दिल्ली में बाढ़ से बेघर हजारों लोग : सरकार के इंतजाम नाकाफी, परिवार टेंट और तिरपाल में रहने को मजबूर
यमुना किनारे बसे 15 हजार परिवार प्रभावित, 10 हजार लोगों का रेस्क्यू; लोग बोले—“हर दो-तीन साल बाढ़ आती है, फिर भी स्थायी समाधान क्यों नहीं?”
दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से हजारों लोग बेघर हो गए हैं। विजय घाट, मजनू का टीला, मयूर विहार, गीता कालोनी जैसे निचले इलाकों से 10 हजार से ज्यादा लोगों को निकालकर टेंटों और शेल्टर कैंप्स में शिफ्ट किया गया है। लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक वे तिरपाल और अस्थायी शिविरों में रहेंगे।
नई दिल्ली (ए)। दिल्ली में यमुना नदी का पानी बढ़ने से निचले इलाकों में हालात बदतर हो गए हैं। अचानक आधी रात घरों में पानी घुसने से हजारों लोग बेघर हो गए। करीब 10 हजार लोगों को प्रशासन ने सुरक्षित निकालकर 38 शेल्टर कैंप्स में ठहराया है, जबकि 15 हजार से ज्यादा परिवार इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
यमुना बाजार घाट की रहने वाली 28 वर्षीय शिवानी बताती हैं—“2 सितंबर की रात 3 बजे अचानक पानी घुस आया। घुटनों तक पानी चढ़ने के बाद हमें घर छोड़ना पड़ा। अब हम सरकार के टेंट में रह रहे हैं, लेकिन सवाल है कि आखिर कब तक ऐसे हालात झेलेंगे? हमारी जिंदगी की जिम्मेदारी कौन लेगा?”
विजय घाट, मजनू का टीला और गीता कालोनी जैसे इलाकों में बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। विजय घाट निवासी तिलकराम का कहना है कि हर दो-तीन साल में यहां बाढ़ आती है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई स्थायी इंतजाम नहीं किया। “सरकार ने दूसरी जगह बसाने की बात कही थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। अधिकारी आते हैं, वादे करते हैं और चले जाते हैं।”
बाढ़ से बच्चों की पढ़ाई और बड़ों के कामकाज पर भी असर पड़ा है। तिलकराम की बेटी माला, जो 7वीं कक्षा में पढ़ती है, बताती है—“घर डूब गया, स्कूल बंद हो गया। अब पढ़ाई कहां से होगी? सुबह से भूखे हैं, शाम को जाकर खाना मिला है।”
गोल्डन जुबली पार्क के पास रहने वाली कनिका कहती हैं कि सरकार ने टेंट का सामान तो भेजा है लेकिन सही ढंग से लगाया नहीं गया। “अगर टेंट जल्दी लग जाते तो हम अपना सामान सुरक्षित रख सकते, लेकिन अब सब पानी में डूबकर खराब हो रहा है।”
खादर इलाके में सैकड़ों मकान पानी में डूबे हैं। लोग जान जोखिम में डालकर घरों से जरूरी सामान निकाल रहे हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखकर स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अब कुछ और दिन तक अपने घर लौटना मुश्किल है।
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