सुवेंदु अधिकारी बने बंगाल विजय के शिल्पकार, टीएमसी छोड़ भाजपा में आते ही बदल गया सियासी समीकरण

नंदीग्राम से शुरू हुई बगावत ने पलटा सत्ता का खेल, 3 सीटों वाली भाजपा को बहुमत तक पहुंचाने वाले चेहरे बने सुवेंदु अधिकारी

सुवेंदु अधिकारी बने बंगाल विजय के शिल्पकार, टीएमसी छोड़ भाजपा में आते ही बदल गया सियासी समीकरण

कोलकाता (ए) । पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्ष 2020 का अंत एक बड़े राजनीतिक भूचाल का संकेत लेकर आया था। ममता बनर्जी सरकार में अहम मंत्री रहे सुवेंदु अधिकारी ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सत्ता गलियारों में हलचल मचा दी थी। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस की चिंताएं बढ़ा दी थीं। पार्टी नेतृत्व ने हालात संभालने की हर संभव कोशिश की, लेकिन सुवेंदु और टीएमसी के बीच बढ़ती दूरियां कम नहीं हो सकीं।

बताया जाता है कि कोलकाता में हुई कई दौर की बैठकों में वरिष्ठ नेताओं और चुनावी रणनीतिकारों ने उन्हें मनाने की कोशिश की। कुछ समय के लिए यह संदेश भी दिया गया कि सब कुछ सामान्य हो गया है, लेकिन अंदरखाने असंतोष लगातार गहराता रहा। जल्द ही सुवेंदु अधिकारी के तेवर खुलकर सामने आने लगे। मेदिनीपुर स्थित उनके कार्यालयों से टीएमसी के पोस्टर हटने लगे और राजनीतिक गलियारों में उनके भाजपा में जाने की चर्चाएं तेज हो गईं।

दिसंबर 2020 में आखिरकार सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस से अलग होने का ऐलान कर दिया। इसके तुरंत बाद उनकी भाजपा में एंट्री ने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह नई दिशा दे दी। मेदिनीपुर में आयोजित विशाल जनसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान मंच पर दोनों नेताओं की नजदीकी और सुवेंदु का शाह के प्रति सम्मान राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया।

भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को बंगाल में अपने सबसे प्रभावशाली चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया। नंदीग्राम से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़कर उन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 77 सीटें हासिल कीं और मुख्य विपक्षी दल के रूप में मजबूत स्थिति बनाई।

इसके बाद बंगाल में भाजपा ने संगठन विस्तार और जनाधार मजबूत करने की रणनीति पर लगातार काम किया। सुवेंदु अधिकारी पार्टी के आक्रामक अभियान का प्रमुख चेहरा बने रहे। 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। चुनाव परिणामों के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने सुवेंदु अधिकारी को बंगाल की नई राजनीतिक धुरी बताते हुए मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी से भाजपा तक का सुवेंदु अधिकारी का सफर केवल दल बदल की कहानी नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक धारा का प्रतीक बन गया है।