नड्डा के नाम पर ‘वसूली का खेल’! कथित पत्रकार पर ब्लैकमेलिंग की FIR, स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सवालों में
अस्पताल से 5 लाख की मांग, फर्जी अधिकार बताकर जांच कराने का आरोप; पत्र के आधार पर विभाग की कार्रवाई से उठे बड़े सवाल
भिलाई में एक कथित पत्रकार द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के नाम का इस्तेमाल कर अस्पतालों पर दबाव बनाने और वसूली के आरोप सामने आए हैं। मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में आ गई है।
भिलाई। छत्तीसगढ़ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के नाम का कथित तौर पर दुरुपयोग कर अस्पतालों पर दबाव बनाने और रकम वसूलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। भिलाई के पावर हाउस स्थित एसबीएस अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर गुरमीत सिंह वाधवा नामक व्यक्ति के खिलाफ ब्लैकमेलिंग की FIR दर्ज की गई है।
अस्पताल प्रबंधक निर्मल सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार आरोपी ने इलाज के दौरान दिए गए कैंसर इंजेक्शन के बिल को आधार बनाकर पहले विवाद खड़ा किया और फिर पांच लाख रुपये की मांग की। आरोप है कि रकम नहीं देने पर आरोपी ने आरटीआई लगाने और झूठी शिकायतों के जरिए कार्रवाई कराने की धमकी दी।
मामले को और गंभीर बनाता है वह पत्र, जिसमें आरोपी ने खुद को एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका का प्रबंध संपादक बताते हुए यह दावा किया कि उसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के अस्पतालों की जांच का अधिकार मिला है। इसी कथित पत्र के आधार पर राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पतालों की जांच शुरू कर दी।
जानकारी के मुताबिक यह पत्र स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव से होते हुए संचालक और फिर दुर्ग जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तक पहुंचा, जिसके बाद नगर निगम के माध्यम से जांच कराई गई। हालांकि जांच में अस्पताल पर लगाए गए सभी आरोप निराधार पाए गए।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वास्तव में किसी अधिकृत स्तर पर इस तरह की जांच के निर्देश दिए गए थे? यदि नहीं, तो विभाग ने बिना सत्यापन के पत्र को आधार बनाकर कार्रवाई क्यों की? साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि क्या इसी तरह अन्य अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर भी जवाबदेही तय होने की मांग उठने लगी है।
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