नागपुर से संचालित करोड़ों के ऑनलाइन सट्टा रैकेट का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड सहित 9 गिरफ्तार

दुर्ग पुलिस की अंतर्राज्यीय कार्रवाई, डेढ़ करोड़ मासिक ट्रांजेक्शन का खुलासा; 23 लाख के सोने-हीरे के जेवर, 85 एटीएम कार्ड और 45 सिम जब्त

दुर्ग पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नागपुर से संचालित एक अंतर्राज्यीय सट्टा सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। मामले में गिरोह के सरगना सहित नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और करीब 23 लाख रुपये मूल्य के सोने-हीरे के आभूषण जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा हर महीने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के ऑनलाइन लेन-देन का खुलासा हुआ है।

दुर्ग-भिलाई। ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत दुर्ग जिले के थाना छावनी पुलिस को सूचना मिली थी कि भिलाई निवासी निशांत कुमार गुप्ता लंबे समय से विभिन्न राज्यों में नेटवर्क बनाकर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे का संचालन कर रहा है। सूचना की पुष्टि होने पर पुलिस ने निशांत को हिरासत में लेकर उसके मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की जांच की, जिसमें ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के संचालन के साक्ष्य मिले।

पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह "क्रिकेट बज बेटिंग एप" और "रूबीबेट" जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टा कारोबार संचालित करता था। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उसने महाराष्ट्र के नागपुर में किराए का मकान लेकर वहां से पूरे नेटवर्क का संचालन शुरू कर रखा था।

जानकारी के आधार पर दुर्ग पुलिस की विशेष टीम ने नागपुर में दबिश देकर ऑनलाइन सट्टा गतिविधियों में लगे आठ अन्य युवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इनमें उत्तर प्रदेश और बिहार के युवक शामिल हैं, जिन्हें वेतन और अन्य सुविधाओं का लालच देकर इस अवैध कारोबार से जोड़ा गया था।

जांच में सामने आया कि आरोपी डिपॉजिट, विड्रॉल, आईडी प्रबंधन, अकाउंट संचालन और तकनीकी सहायता जैसे कार्य संभालते थे। प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये तक भुगतान किया जाता था। गिरोह प्रतिदिन चार से पांच लाख रुपये का ऑनलाइन लेन-देन कर रहा था, जो मासिक स्तर पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच रहा था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 26 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, दो आईपैड, 85 एटीएम कार्ड, 18 बैंक पासबुक, 45 सिम कार्ड, चेकबुक, आधार कार्ड, हिसाब-किताब से जुड़े दस्तावेज और 1.54 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।

विवेचना के दौरान यह भी पता चला कि सट्टे की रकम को छिपाने और खपाने के लिए फर्जी अथवा धोखाधड़ी से प्राप्त बैंक खातों, एटीएम कार्डों और मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया जा रहा था। रकम को कई खातों में स्थानांतरित कर उसके वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों को छिपाने का प्रयास किया जाता था।

पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि मुख्य आरोपी ने ऑनलाइन सट्टे से अर्जित अवैध आय से सोने और हीरे के महंगे आभूषण खरीदे थे। ये आभूषण भिलाई स्थित एक ज्वेलर्स के यहां गिरवी रखे गए थे। पुलिस ने लगभग 15 तोला सोना और डायमंड मिश्रित जेवरात जब्त किए हैं, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 23 लाख रुपये बताई गई है।

मामले में आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा टेलीकॉम अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर वित्तीय नेटवर्क और अवैध संपत्तियों की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।