9वीं में तीसरी भाषा की शुरुआत पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, छात्रों पर बढ़ेगा अनावश्यक दबाव

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा- नई भाषा की पढ़ाई छठी कक्षा से होनी चाहिए; त्रि-भाषा नीति पर रोक से इनकार, अगले सप्ताह होगी सुनवाई।

9वीं में तीसरी भाषा की शुरुआत पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, छात्रों पर बढ़ेगा अनावश्यक दबाव

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की त्रि-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने नौवीं कक्षा से तीसरी भाषा लागू करने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के दौर में नई भाषा जोड़ना विद्यार्थियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाल सकता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस नीति पर रोक लगाने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।

नई दिल्ली (ए)। सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने नौवीं कक्षा से तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू करने को उचित नहीं माना। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं, ऐसे में नई भाषा का बोझ उनके लिए अनावश्यक तनाव का कारण बन सकता है। उनका सुझाव था कि तीसरी भाषा की शिक्षा छठी कक्षा से शुरू कराई जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थी उसे सहजता से सीख सकें।

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा है मामला

यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार की उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें राज्य ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) खोलने की अनुमति देने का निर्देश दिया गया था। तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि नवोदय विद्यालयों में लागू त्रि-भाषा व्यवस्था उसकी भाषा नीति के अनुरूप नहीं है।

नीति पर रोक लगाने से अदालत का इनकार

उधर, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष त्रि-भाषा नीति को चुनौती देने वाली कई जनहित याचिकाएं भी लंबित हैं। शीर्ष अदालत ने फिलहाल इस नीति के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

'किसी भाषा को अनिवार्य नहीं बनाया गया'

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से त्रि-भाषा नीति पर आपत्ति जताई गई। इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि नीति में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है। इसमें विद्यार्थियों को राज्य की मातृभाषा, अंग्रेजी और किसी एक अन्य भाषा का अध्ययन करने का विकल्प दिया गया है।

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता जी. प्रियदर्शिनी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपने का प्रावधान नहीं है।

'भाषा सीखने की सही उम्र मिडिल स्कूल'

जब राज्य सरकार के वकील ने बताया कि तीसरी भाषा नौवीं कक्षा से अनिवार्य की जाती है, तब न्यायमूर्ति नागरत्ना ने इस पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि नई भाषा सीखने की शुरुआत जितनी कम उम्र में होगी, विद्यार्थियों के लिए उसे समझना उतना ही आसान रहेगा। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके समय में छठी कक्षा से तीसरी भाषा पढ़ाई जाती थी, जिससे आगे की पढ़ाई में कोई अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं होता था।