बंगाल की सत्ता पर संवैधानिक पेच: ममता सरकार के भविष्य को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
विधानसभा कार्यकाल समाप्ति के करीब, इस्तीफे और नई सरकार गठन को लेकर बना असमंजस
कोलकाता (ए)। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय असाधारण संवैधानिक और राजनीतिक स्थिति से गुजर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे और नई सरकार के गठन को लेकर जारी अनिश्चितता ने राज्य में संवैधानिक संकट की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। विधानसभा का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अब तक सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।
राजनीतिक और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो राज्य प्रशासन एक जटिल संवैधानिक स्थिति में फंस सकता है। इसी कारण अगले 48 घंटे बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
राज्यपाल और सरकार के बीच बढ़ी संवैधानिक जटिलता
मौजूदा स्थिति में सबसे अहम भूमिका राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस की मानी जा रही है। संवैधानिक परंपराओं के अनुसार विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने से पहले मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपते हैं, जिसके बाद नई सरकार के गठन तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने का अनुरोध किया जाता है।
हालांकि राजभवन और राज्य सरकार के बीच पहले से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों के कारण इस प्रक्रिया को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। अब तक राजभवन की ओर से किसी आधिकारिक बैठक या फैसले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
‘संवैधानिक शून्य’ की आशंका पर बढ़ी चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो जाता है और उसी दौरान नई सरकार का गठन या इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो राज्य में अस्थायी संवैधानिक शून्य जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में प्रशासनिक अधिकारों और निर्णयों की वैधता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार राज्यपाल के पास ऐसे हालात में केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजने या विशेष संवैधानिक विकल्पों पर विचार करने का अधिकार होता है। हालांकि अंतिम निर्णय परिस्थितियों और कानूनी सलाह पर निर्भर करेगा।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि जनता ने उन्हें स्पष्ट जनादेश दिया है और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।
वहीं विपक्ष ने सरकार पर सत्ता से चिपके रहने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से संविधान के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। इस सियासी खींचतान ने राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
प्रशासनिक अमले में भी बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक संभावित संवैधानिक स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। राज्य की नौकरशाही भी इस बात पर नजर बनाए हुए है कि आगामी दिनों में शासन व्यवस्था किस रूप में आगे बढ़ेगी।
अब सबकी निगाहें राजभवन और मुख्यमंत्री आवास से आने वाले अगले राजनीतिक संकेतों पर टिकी हुई हैं, जो बंगाल की सत्ता की दिशा तय कर सकते हैं।
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