‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रगान के समान दर्जा, कैबिनेट की मंजूरी से बदले नियम

अपमान या गायन में बाधा पर सजा का प्रावधान; सरकारी समारोहों में पहले गाया जाएगा राष्ट्रगीत, फिर राष्ट्रगान

‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रगान के समान दर्जा, कैबिनेट की मंजूरी से बदले नियम

नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान दर्जा देने का अहम निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन का रास्ता भी साफ हो गया है।

सरकार के इस फैसले के बाद अब वंदे मातरम के सम्मान और प्रस्तुति से जुड़े वही नियम लागू होंगे, जो वर्तमान में राष्ट्रगान पर लागू हैं। यानी इसके अपमान या गायन में बाधा डालने पर दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान शामिल होगा।

सरकार यह कदम वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उठा रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून की धारा 3 में बदलाव किया जाएगा। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान के गायन में व्यवधान डालता है, तो उसे तीन वर्ष तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने पर न्यूनतम एक वर्ष की सजा का प्रावधान भी रहेगा।

गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत के गायन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार, वंदे मातरम का पूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसमें छह श्लोक शामिल हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है, प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें ध्वजारोहण, राष्ट्रपति और राज्यपालों के औपचारिक कार्यक्रमों के आगमन-प्रस्थान समारोह तथा उनके भाषण से पहले और बाद के आयोजन शामिल हैं।

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का आयोजन हो, वहां पहले वंदे मातरम और उसके बाद जन गण मन गाया जाएगा। दोनों के दौरान उपस्थित लोगों के लिए सावधान मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य होगा।

सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में भी वंदे मातरम के गायन को प्रोत्साहित करने की अपील की है, ताकि युवाओं और आम नागरिकों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाई जा सके। हालांकि, सिनेमा हॉल और फिल्म प्रदर्शन के दौरान बजने वाले वंदे मातरम के लिए विशेष छूट दी गई है, जहां दर्शकों के लिए खड़े होना अनिवार्य नहीं होगा।

गौरतलब है कि वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में की थी, जो बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया था। वहीं, वर्ष 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया था।

हाल के चुनावी परिदृश्य में भी वंदे मातरम एक प्रमुख मुद्दा रहा, जहां इसे सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में प्रमुखता से उठाया गया। सरकार के इस फैसले को उसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।