RTE प्रवेश पर हाईकोर्ट सख्त, 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं आने पर शासन से मांगा जवाब

कोर्ट ने पूछा- क्या बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते गरीब बच्चे, शिक्षा सचिव को शपथ पत्र के साथ पेश करनी होगी पूरी जानकारी

RTE प्रवेश पर हाईकोर्ट सख्त, 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं आने पर शासन से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब और जरूरतमंद बच्चों के प्रवेश को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उस समय हैरानी व्यक्त की जब सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदेश के करीब 387 निजी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। इनमें कई बड़े और प्रतिष्ठित स्कूल भी शामिल हैं।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में हुई। शिक्षा के अधिकार कानून को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने शपथ पत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि 366 स्कूल ऐसे भी हैं जहां उपलब्ध सीटों की तुलना में आवेदन बेहद कम आए हैं।

राज्य सरकार के जवाब पर कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते या फिर कहीं प्रशासनिक स्तर पर कुछ छिपाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जा सकती, खासकर तब जब RTE के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, तब भी गरीब बच्चों का प्रवेश लंबित क्यों है। न्यायालय ने अधिकारियों से पूछा कि क्या विभागीय लापरवाही के कारण हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि RTE के तहत सभी स्कूलों में आरक्षित सीटों की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जाए। साथ ही शिक्षा सचिव को 10 जुलाई तक शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब पेश करने कहा गया है। सरकार को यह बताना होगा कि किस स्कूल में कितनी सीटें निर्धारित की गईं, कितने आवेदन आए और किन बच्चों को प्रवेश दिया गया।

कोर्ट ने उस जानकारी पर भी नाराजगी जताई जिसमें कुछ स्कूलों में केवल एक या दो बच्चों के एडमिशन का उल्लेख किया गया था। इस पर डिवीजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल में केवल एक बच्चे का प्रवेश हुआ है, तो क्या वहां कुल चार छात्र ही अध्ययनरत हैं। कोर्ट ने संकेत दिए कि RTE व्यवस्था के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हो सकती हैं, जिनकी विस्तृत जांच आवश्यक है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को पूरे आंकड़ों और तथ्यों के साथ जवाब देना होगा। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।