टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह: कल्याण बनर्जी ने ममता के सामने रखी शर्त, तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफों से सियासी हलचल तेज

अभिषेक बनर्जी पर वरिष्ठ नेताओं के अपमान का आरोप; बागी नेताओं का दावा- 20 सांसद और 58 विधायक अलग खेमे में, कांग्रेस ने विलय की अटकलों को किया खारिज

टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह: कल्याण बनर्जी ने ममता के सामने रखी शर्त, तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफों से सियासी हलचल तेज

कोलकाता/नई दिल्ली (ए)। तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची सियासी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को नेतृत्व शैली और संगठनात्मक फैसलों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह उनके साथ हैं या फिर अभिषेक बनर्जी के साथ। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी वरिष्ठ नेताओं को सम्मान नहीं देते और उनके व्यवहार के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व पूरी तरह अभिषेक बनर्जी पर निर्भर रहना चाहता है तो उन्हें अलग राह चुनने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि संगठन अनुभव और वरिष्ठता को महत्व देता है तो वह ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने हाल ही में चर्चित फर्जी हस्ताक्षर मामले में वकीलों की टीम बदले जाने को अपने सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए असंतोष जताया।

इधर, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बीते चार दिनों में यह तीसरा इस्तीफा है, जिससे टीएमसी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इससे पहले सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय भी पार्टी से दूरी बना चुके हैं।

इस्तीफे के बाद प्रकाश चिक बड़ाईक ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने हालिया चुनावों में बदलाव का संकेत दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके क्षेत्र सहित उत्तर बंगाल में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। ऐसे में नैतिक आधार पर पद पर बने रहना उचित नहीं था। हालांकि उन्होंने भविष्य की राजनीतिक भूमिका पर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया।

दूसरी ओर, पार्टी के भीतर बगावत के दावों ने भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। बागी सांसद काकोली घोष का दावा है कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद अलग गुट बनाकर नई राजनीतिक दिशा तय करने की तैयारी में हैं। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि राज्य के 80 में से 58 विधायक अलग खेमे में हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।

टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वह पूरी मजबूती से ममता बनर्जी और पार्टी के साथ हैं। उन्होंने ममता को संघर्षशील नेता बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी का जनाधार कायम है।

इस बीच कांग्रेस ने टीएमसी के साथ संभावित विलय की चर्चाओं को सिरे से नकार दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई मुलाकात सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थी और विलय की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।

उधर, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की मान्यता को लेकर विवाद भी गहराता जा रहा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि क्या किसी राजनीतिक दल की स्वीकृति के बिना किसी बागी विधायक को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की गई है।

लगातार इस्तीफों, बगावत के दावों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने टीएमसी की राजनीतिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर की स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों और समर्थकों की नजरें टिकी हुई हैं।