दुर्ग में कृषि विभाग का बड़ा एक्शन, अवैध खाद-कीटनाशक कारोबार पर दो एफआईआर
बिना लाइसेंस जैव उत्पादों का निर्माण और महंगे दाम पर उर्वरक बेचने का खुलासा, गोदाम सील कर स्टॉक जब्त; नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई शुरू
दुर्ग जिले में किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज कराई है। जांच में एक स्थान पर बिना वैध लाइसेंस जैव उत्प्रेरक एवं कीटनाशकों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था, जबकि दूसरे मामले में निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया। विभाग ने संबंधित स्टॉक जब्त कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
दुर्ग। दुर्ग जिले में अवैध उर्वरक एवं कीटनाशक कारोबार के खिलाफ कृषि विभाग ने सख्ती दिखाते हुए दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की है। जांच के दौरान बिना लाइसेंस जैव उत्प्रेरक और कीटनाशकों के निर्माण एवं भंडारण का खुलासा हुआ, वहीं दूसरी ओर किसानों को सरकारी दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने और रिकॉर्ड में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
बिना लाइसेंस संचालित हो रहा था निर्माण केंद्र
अनुविभागीय कृषि अधिकारी की शिकायत पर थाना अंडा में मामला दर्ज किया गया। विभाग को सूचना मिली थी कि ग्राम चिंगरी स्थित एक गोदाम में बिना वैध अनुज्ञप्ति के जैव उत्प्रेरक एवं कीटनाशकों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा है। जांच टीम के मौके पर पहुंचने पर गोदाम बंद मिला। पूछताछ में मकान मालिक ने बताया कि परिसर रीवा निवासी वरुण त्रिपाठी को किराए पर दिया गया है।
ताला खुलवाकर की गई जांच
टीम ने संबंधित व्यक्ति को मौके पर बुलाया, लेकिन उसके नहीं पहुंचने पर पंचों और ग्रामीणों की मौजूदगी में गोदाम का ताला खुलवाकर निरीक्षण किया गया।
कच्चा माल और तैयार उत्पाद मिले
जांच के दौरान बड़ी मात्रा में जैव उत्प्रेरक एवं कीटनाशकों के निर्माण में उपयोग होने वाला कच्चा माल तथा तैयार उत्पाद बरामद किए गए। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि बिना लाइसेंस निर्माण एवं भंडारण किया जा रहा था। रिकॉर्ड संधारित नहीं किए गए थे, कैश मेमो जारी नहीं किए जा रहे थे और निरीक्षण में भी सहयोग नहीं किया गया। कृषि विभाग ने पूरे स्टॉक को जब्त करते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश तथा कीटनाशक अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
पाटन में किसानों से वसूली जा रही थी अधिक कीमत
दूसरे मामले में जिला स्तरीय जांच दल ने पाटन स्थित एक कृषि सेवा केंद्र की जांच की। टीम ग्राहक बनकर दुकान पहुंची और यूरिया तथा मिश्रित उर्वरक खरीदा। जांच में सामने आया कि दुकानदार किसानों से निर्धारित सरकारी मूल्य से कहीं अधिक राशि वसूल रहा था।
बिल में कम राशि, भुगतान अधिक
जांच के दौरान पाया गया कि यूरिया का सरकारी मूल्य 266 रुपये प्रति बैग होने के बावजूद किसानों से 500 रुपये वसूले जा रहे थे। ऑनलाइन भुगतान लेने के बाद भी जारी बिल में वास्तविक भुगतान से कम राशि दर्ज की गई थी।
स्टॉक और दस्तावेजों में भी मिली गड़बड़ी
निरीक्षण में पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और गोदाम में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया गया। दुकान पर निर्धारित मूल्य सूची और उपलब्ध स्टॉक का प्रदर्शन नहीं किया गया था। कैश मेमो सहित अन्य अनिवार्य अभिलेखों का भी नियमानुसार संधारण नहीं किया जा रहा था।
उर्वरक जब्त, कानूनी कार्रवाई शुरू
कृषि विभाग ने संबंधित दुकान से यूरिया और मिश्रित उर्वरक का स्टॉक जब्त कर लिया है। दोनों मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 एवं 7 सहित उर्वरक (नियंत्रण) आदेश और कीटनाशक अधिनियम के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिले में ऐसे प्रतिष्ठानों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
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