प्रधान के इस्तीफे पर सियासत तेज, भूपेश बोले- यह छात्रों की जीत
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, बिलासपुर में छात्रों ने निकाली विजय रैली; कहा- परीक्षा सुधार की लड़ाई अभी जारी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे देशभर के छात्रों की जीत बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। वहीं बिलासपुर में छात्र संगठनों और युवाओं ने विजय रैली निकालकर खुशी जताई, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है।
रायपुर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह देश के युवाओं और छात्रों की जीत है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ छात्रों के संघर्ष का परिणाम बताया।
भूपेश बघेल ने अपने बयान में केंद्र सरकार की तुलना पौराणिक पात्र हिरण्यकश्यप से करते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी ने 'नरसिंह अवतार' की तरह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि छात्रों के दबाव के आगे सत्ता को झुकना पड़ा और यह लोकतांत्रिक संघर्ष की सफलता का प्रतीक है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को लेकर तरह-तरह के आरोप लगाए गए, लेकिन अंततः छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास और अधिकारों की जीत है।
उधर, बिलासपुर में विभिन्न छात्र संगठनों और युवा कार्यकर्ताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विजय रैली निकाली। रैली के दौरान छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इस्तीफा नहीं था, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना भी है। इसलिए उनकी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।
पेपर लीक कानून पर भी चर्चा तेज
इधर, परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए लागू किए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। वर्ष 2024 में लागू इस कानून के तहत पेपर लीक, नकल कराने, परीक्षा सामग्री का अवैध उपयोग, फर्जी वेबसाइट बनाकर अभ्यर्थियों को गुमराह करने तथा परीक्षा प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे अपराधों को गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। कानून में दोषियों के लिए कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।
प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं, वहीं छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग पर अब भी अडिग दिखाई दे रहे हैं।
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