पेवर ब्लॉक भुगतान विवाद में इंजीनियरों को हाईकोर्ट से राहत

16.85 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी के मामले में कार्रवाई पर अंतरिम रोक; इंजीनियरों ने जांच में पक्ष नहीं सुने जाने का उठाया मुद्दा

पेवर ब्लॉक भुगतान विवाद में इंजीनियरों को हाईकोर्ट से राहत

भिलाई। नगर निगम में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही कार्रवाई पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने दुर्ग कलेक्टर के कार्रवाई और वसूली संबंधी निर्देशों तथा नगर निगम के मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई है। मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को निर्धारित है।

29 अनुबंधों में से 21 पर उठे सवाल

नगर निगम के पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच वर्ष 2023-24 के दौरान किए गए 29 अनुबंधों के आधार पर हुई थी। जांच रिपोर्ट में 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज निर्माण की मात्रा और मौके पर उपलब्ध वास्तविक कार्य के बीच अंतर मिलने का उल्लेख किया गया। इसके आधार पर 16 लाख 85 हजार 457 रुपए के कथित अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया। जांच निष्कर्षों के बाद संबंधित अभियंताओं और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई।

कलेक्टर के पत्र के बाद जारी हुए नोटिस

शिकायतों के आधार पर दुर्ग कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं से संयुक्त जांच कराई थी। 27 अगस्त 2026 को तैयार रिपोर्ट के बाद कलेक्टर ने 3 सितंबर को नगर निगम आयुक्त को पत्र भेजकर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई और कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली के निर्देश दिए। इसके बाद निगम के मुख्य अभियंता ने 16 सितंबर को संबंधित अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए। उप अभियंता अर्पित बंजारे सहित अन्य अभियंताओं ने इन नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

जांच में सुनवाई का अवसर नहीं देने की दलील

याचिकाकर्ता अभियंताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। उनका आरोप था कि जांच प्रक्रिया में शामिल किए बिना ही रिपोर्ट में उनके नाम दर्ज कर दिए गए और कार्रवाई व वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। उन्होंने यह भी दलील दी कि कलेक्टर के पत्र में पहले ही कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के कारण बाद में जारी कारण बताओ नोटिस औपचारिकता बनकर रह गए। याचिकाकर्ताओं ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया।

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी तथा अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक और अपूर्वा निगम ने पैरवी की।

शासन ने कार्रवाई को बताया नियमों के अनुरूप

राज्य शासन की ओर से अदालत में कहा गया कि शिकायतों के आधार पर कराई गई जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार ही निर्देश जारी किए गए थे। शासन ने कलेक्टर के पत्र और कारण बताओ नोटिस को नियमानुसार बताया। प्रतिवादियों ने जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने कलेक्टर के 3 सितंबर के पत्र और मुख्य अभियंता के 16 सितंबर के नोटिस के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। साथ ही राज्य शासन, दुर्ग कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

42 करोड़ के कार्यों का हिसाब भी चर्चा में

पेवर ब्लॉक निर्माण को लेकर इससे पहले भी नगर निगम की परियोजना शाखा के कार्यों पर सवाल उठ चुके हैं। करीब 42 करोड़ रुपए के कार्यों और उनके लेखा-जोखा की पड़ताल के दौरान लगभग 30 करोड़ रुपए के कार्यों का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं होने तथा कई फाइलों की जांच नहीं हो पाने की बात सामने आई थी।

फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश अंतरिम राहत तक सीमित है। इससे जांच में दर्ज कथित अनियमितताओं या संबंधित अभियंताओं की जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मामले में शासन और संबंधित अधिकारियों के जवाब तथा आगामी सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।