अब पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य, परिवहन विभाग का सख्त आदेश

चार वर्ष से अधिक उम्र के सभी सवारों पर नियम लागू, शोरूम संचालकों की जिम्मेदारी भी तय

अब पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य, परिवहन विभाग का सख्त आदेश

राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए दोपहिया वाहनों पर हेलमेट नियमों को लेकर व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। अब केवल वाहन चालक ही नहीं, बल्कि पीछे बैठने वाले सहयात्री के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

रायपुर। राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली गंभीर चोटों को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने हेलमेट नियमों के सख्त पालन के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब दोपहिया वाहन पर सफर करने वाले हर व्यक्ति—चाहे वह चालक हो या पीछे बैठा सहयात्री—को हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा।

अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (RTO), अतिरिक्त आरटीओ और जिला परिवहन अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर दोपहिया वाहन चलाते या उस पर सवारी करते समय चार वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। यह प्रावधान मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 129 के तहत लागू किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल वाहन चालक तक सीमित नहीं है, बल्कि पीछे बैठने वाले यात्रियों पर भी समान रूप से लागू होता है। हेलमेट को सही तरीके से पहनना और उसकी स्ट्रैप को ठीक से बांधना भी उतना ही जरूरी है, ताकि दुर्घटना के समय सिर को गंभीर चोटों से बचाया जा सके।

विभाग ने केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के तहत एक और महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किया है, जिसमें दोपहिया वाहन की बिक्री के समय डीलर या निर्माता द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों के अनुरूप हेलमेट देना अनिवार्य किया गया है। इसका मतलब है कि अब शोरूम संचालक बिना हेलमेट दिए वाहन की डिलीवरी नहीं कर सकते।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई डीलर इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई केवल सड़क पर नियम तोड़ने वालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी इसके दायरे में शामिल किया जाएगा।

हाल ही में हेलमेट नियमों के कमजोर क्रियान्वयन को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। इस संबंध में सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।

परिवहन विभाग ने यह भी माना है कि केवल चालान और दंड से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, जिससे लोगों को हेलमेट पहनने के महत्व और इसके सुरक्षा लाभों के बारे में बताया जा सके।

सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि दोपहिया दुर्घटनाओं में अधिकांश मौतें सिर में गंभीर चोट लगने के कारण होती हैं। ऐसे में हेलमेट का उपयोग जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

विभाग ने सभी जिलों में इस अभियान की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं और उम्मीद जताई है कि सख्त प्रवर्तन और जागरूकता के संयुक्त प्रयास से सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी।