बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल: “गरीबों पर सख्ती, रसूखदारों पर खामोशी क्यों?”
मानवाधिकार संरक्षण आयोग के प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने महापौर को लिखा पत्र
रायपुर में नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर अब भेदभाव के आरोप लगने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रशासन की सख्ती केवल छोटे ठेले-खोमचे और गरीब वर्ग तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि बड़े और प्रभावशाली संस्थानों द्वारा किए जा रहे पार्किंग नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
रायपुर। शहर में नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने रायपुर की महापौर को पत्र लिखकर निगम की कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शर्मा का आरोप है कि निगम की कार्रवाई का दायरा केवल छोटे व्यापारियों और ठेला-खोमचा लगाने वाले गरीब लोगों तक ही सीमित दिखाई दे रहा है। इससे कई परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। वहीं दूसरी ओर शहर के बड़े शॉपिंग मॉल, निजी स्कूल, मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल, होटल और मैरिज गार्डन बिना पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था के संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के बाहर सड़कों पर खड़े वाहनों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और आम नागरिकों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। यह स्थिति नागरिकों के निर्बाध आवागमन के अधिकार का भी उल्लंघन है।
शर्मा ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि कई संस्थानों ने स्वीकृति के दौरान कागजों में पार्किंग स्थल दर्शाया था, लेकिन वास्तविकता में उन स्थानों का उपयोग दुकानों या गोदाम के रूप में किया जा रहा है। इसे उन्होंने नगर निगम अधिनियम के उल्लंघन के साथ-साथ भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जिस तरह गरीबों के अतिक्रमण पर कार्रवाई की जा रही है, उसी तरह उन भवनों और संस्थानों को भी चिन्हित कर कार्रवाई की जाए जिन्होंने पार्किंग की जगह का व्यावसायिक उपयोग कर लिया है।
प्रदुमन शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रभावशाली संस्थानों के खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई नहीं की गई, तो इसे सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के विपरीत माना जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वह अपनी छवि को ‘गरीब विरोधी’ बनने से बचाए और नियमों का पालन सभी पर समान रूप से लागू करे।
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