सिर्फ एक बोरवेल मशीन काफी? छत्तीसगढ़ के 477 गांवों में जल संकट के बीच PHE का दावा, सच्चाई हैरान कर देगी
रायपुर जिले में गर्मी के मौसम के बीच जल संकट गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि 477 गांवों के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के पास सिर्फ एक ही बोरवेल मशीन उपलब्ध है, जिससे समय पर बोर खनन कार्य नहीं हो पा रहा है।
दिन पर दिन जल संकट बढ़ते जा रहा है, भू-जल स्तर नीचे गिर रहा है। पुराने हैंडपंप और बोर सूख चुके है। उसके बावजूद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) विभाग अपने जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है। विभाग के अधिकारी की नाकामी के कारण लाखों लोगों को पानी की किल्लतों का सामना करना पड़ा रहा है। रायपुर जिले में 477 गांव है, वहीं इन गांव में सरकारी बोर करने के लिए विभाग के पास मात्र एक बोरवेल मशीन है। इसके कारण जरूरत के समय विभाग समय पर बोर खनन नहीं कर पा रहा है। जबकि आधी गर्मी भी जा चुकी है।
वहीं विभाग के जिला अधिकारी अनिल बच्चे का कहना है कि एक बोर ही काफी है। बोर कराने के लिए विभाग को प्राइवेट बोरवेल मशीन की जरूरत नहीं है। जबकि जानकारी के अनुसार इस साल 100 बोर करने का टार्गेट दिया गया था, उसके बावजूद विभाग मुश्किल से 33 बोर खनन ही कर पाई है। जो कि अपने टार्गेट से काफी दूर है।
हर साल बोर कराने सौ से ज्यादा आवेदन आ रहे
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग के पास हर साल सौ से अधिक आवेदन बोरवेल के लिए मिलते है। लेकिन एक ही मशीन होने के कारण विभाग अपने लक्क्ष्य का 50 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं कर पाता है। वहीं जिम्मेदार अधिकारी जवाब में कह रहे है कि उन्हें अन्य मशीन की जरूरत नहीं है। इससे अब पीएचई विभाग के कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे है? क्योकि विभाग चाहे तो प्राइवेट बोरवेल से अनुबंध कर कार्य को पूरा कर सकते है।
जल जीवन मिशन के तहत 170 से अधिक गांव का काम अटका
जलजीवन के मिशन के तहत 170 से अधिक गांव का कार्य अटका हुआ है। स्थिति ऐसी है कि कही पंप सूख गए तो, कही टंकी अधूरी है। तो कहीं कनेक्शन नहीं जुड़ा है। जबकि इस मिशन के तहत घर-घर नल से जल पहुंचाना था। लेकिन विभाग की कार्यप्रणाली के कारण लोगों को पानी जैसी सुविधा के लिए तरसना पड़ रहा है।
वहीं कई गांव के स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि कई गांवों में कागजों पर काम पूरा दिखा दिया गया है, लेकिन धरातल पर अब तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। इसको लेकर भी विभाग के अधिकारी पर कई सवाल खड़े हो रहे है। यहां तक की अधिकारी ने जिला पंचायत की सामान्य सभा में भी गलत जानकारी प्रस्तुत की थी। जिसपर उन्हें जिला पंचायत सीईओ और जिला पंचायत अध्यक्ष ने लाताड़ लगाई थीं।
सीधी बात- अनिल कुमार बच्चन, ईई, पीएचई विभाग
सवाल- इस बार कितने बोर करने का लक्क्ष्य रखा गया था, कितना हुआ?
जवाब- सौ बोर कराने का लक्क्ष्य है, पर कितना हुआ है इसकी जानकारी नहीं है, देखना पड़ेगा।
सवाल- 477 गांव के लिए एक बोर मशीन है, कैसे लक्क्ष्य पूरा करेंगे, प्राइवेट के साथ अनुबंध नहीं?
जवाब- एक बोरवेल मशीन फाइनेशियल ईयर के लिए पर्याप्त है। प्राइवेट मशीन की जरूरत नहीं।
सवाल- जलजीवन मिशन के तहत भी काम पूरा नहीं है, अबतक कितना खर्च हुआ?
जवाब- कितना खर्च हुआ वो तो नहीं पता, लेकिन दो साल से जलजीवन मिशन का पैसा नहीं आया है।
बहुत से ऐसे गांव है पानी की किल्लत है, लेकिन विभाग टार्गेट पूरा नहीं कर पा रहा है। एक और बोरवेल मशीन खरीदने की जरूरत है, नहीं तो प्राइवेट के साथ अनुबंध करके भी टार्गेट पूरा किया जा सकता है। - संदीप यदु, जिला पंचायत उपाध्यक्ष, रायपुर
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