देश के बड़े माओवादी नेताओं में शामिल मिसिर बेसरा गिरफ्तार: बस्तर नेटवर्क का प्रमुख रणनीतिकार झारखंड में दबोचा गया

डेढ़ करोड़ का इनामी, 55 सुरक्षाकर्मियों की शहादत वाले IED ब्लास्ट का आरोपी; दो साथियों के साथ विशेष अभियान में पकड़ा गया

देश के बड़े माओवादी नेताओं में शामिल मिसिर बेसरा गिरफ्तार: बस्तर नेटवर्क का प्रमुख रणनीतिकार झारखंड में दबोचा गया

जगदलपुर/रांची। सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। देश के शीर्ष माओवादी नेताओं में शामिल और छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित कई राज्यों में सक्रिय रहे कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा को झारखंड में गिरफ्तार कर लिया गया। डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के इनामी इस माओवादी नेता को मंगलवार को विशेष अभियान के दौरान उसके दो साथियों के साथ दबोचा गया। वह माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो का सदस्य तथा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (ERB) का प्रभारी रहा है।

नए ठिकाने की तलाश में था, घेराबंदी कर पकड़ा गया

सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा सारंडा, गिरिडीह और पारसनाथ की पहाड़ियों के रास्ते अपने साथियों के साथ नया सुरक्षित ठिकाना तलाशने निकल रहा है। इसके बाद संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया गया और घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

20 वर्षों से कई राज्यों में सक्रिय

झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र के मदनडीह गांव का रहने वाला मिसिर बेसरा पिछले करीब दो दशकों से झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय था। उस पर हत्या, IED विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर अपराधों के 100 से अधिक मामले दर्ज हैं।

55 जवानों की शहादत वाले हमले का आरोपी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पश्चिम सिंहभूम जिले के बिटकिलसोय और बलिबा क्षेत्र में वर्ष 2003-04 के दौरान हुए IED विस्फोटों की साजिश रचने का आरोप भी उसी पर है। इन हमलों में 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इसके अलावा 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर हुए नक्सली हमले के दौरान उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया गया था, जिसके बाद वह लगातार फरार चल रहा था।

बस्तर में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी संभालता था

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मिसिर बेसरा का बस्तर संभाग से गहरा संबंध रहा है। वह माओवादी संगठन के केंद्रीय नेतृत्व का हिस्सा होने के कारण दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी और पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के बीच समन्वय स्थापित करता था। बस्तर, अबूझमाड़, दक्षिण बस्तर और महाराष्ट्र सीमा से लगे नक्सल प्रभावित इलाकों में कैडर प्रशिक्षण, हथियार आपूर्ति और बड़े ऑपरेशनों की रणनीति बनाने में उसकी अहम भूमिका मानी जाती है।

शीर्ष नेतृत्व की जानकारी का बड़ा स्रोत

सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। उसकी गिरफ्तारी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह माओवादी संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई का सदस्य रहा है और उसे संगठन की फंडिंग, संचालन व्यवस्था, हथियार नेटवर्क तथा विभिन्न राज्यों में फैले माओवादी तंत्र की विस्तृत जानकारी होने की संभावना है।

सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब अन्य शीर्ष नेताओं पर

सूत्रों के अनुसार माओवादी संगठन के अन्य शीर्ष नेताओं की तलाश भी तेज कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां संगठन के शेष केंद्रीय नेतृत्व और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं, जिससे माओवादी ढांचे को और कमजोर करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।