अब हर नई गतिविधि के लिए नहीं करनी पड़ेगी नियमों की लंबी तलाश

भूमि विकास नियमों में संशोधन का प्रस्ताव; केवल प्रतिबंधित कामों की बनेगी सूची, बाकी गतिविधियों के लिए आसान होगा रास्ता

अब हर नई गतिविधि के लिए नहीं करनी पड़ेगी नियमों की लंबी तलाश

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े पुराने तौर-तरीकों को बदलकर उन्हें समय के अनुरूप बनाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने भूमि विकास नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसमें Negative List आधारित व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इस मॉडल में यह तय किया जाएगा कि किसी खास भूमि उपयोग क्षेत्र में कौन-कौन से काम नहीं किए जा सकेंगे। प्रतिबंधित गतिविधियों को छोड़कर अन्य उपयोगों को अनुमति देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकास के साथ नियमों का सरल होना भी जरूरी है। सरकार चाहती है कि नागरिकों और निवेशकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं में समय न गंवाना पड़े और प्रदेश में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट व्यवस्था उपलब्ध हो। भूमि उपयोग नियमों में बदलाव इसी उद्देश्य से किया जा रहा है।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रस्तावित सुधार के जरिए नियंत्रण खत्म नहीं होगा, बल्कि उसे अधिक तार्किक बनाया जाएगा। जिन गतिविधियों से पर्यावरण, जनसुरक्षा या किसी क्षेत्र की मूल प्रकृति प्रभावित हो सकती है, उन पर स्पष्ट रोक रहेगी। दूसरी ओर, नई आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप सामने आने वाली गतिविधियों के लिए नियमों में अनावश्यक रुकावट कम होगी।

पुरानी सूची की जगह प्रतिबंधों पर आधारित व्यवस्था

मौजूदा समय में नई-नई गतिविधियों के सामने आने के साथ भूमि उपयोग की अनुमति को लेकर नियमों की व्याख्या जटिल हो सकती है। सरकार अब ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है, जिसमें अनुमति वाली गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय केवल निषिद्ध गतिविधियां स्पष्ट की जाएं। इससे भविष्य में सामने आने वाले नए व्यवसायों और सेवाओं के लिए भी नियमानुसार रास्ता खुला रहेगा।

घरों के आसपास नहीं होंगे जोखिम वाले उपयोग

आवासीय इलाकों को सुरक्षित और रहने योग्य बनाए रखने के लिए प्रदूषणकारी उद्योग, बड़े भंडारण केंद्र, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक कारोबार, तेल डिपो, गैस गोदाम और ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, कुक्कुट पालन, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान और खनन को भी इस सूची में रखा गया है।

बाजार क्षेत्रों में खतरनाक गतिविधियों पर नियंत्रण

वाणिज्यिक क्षेत्र में ऐसे उद्योगों और गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है, जो कारोबार क्षेत्र की प्रकृति से मेल नहीं खाते। नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योग, खतरनाक एवं विषैले रसायनों का भंडारण, विस्फोटक पदार्थ, पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट पालन, मछली पालन और खनन जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित सूची में रहेंगी।

औद्योगिक क्षेत्रों में भी आवासीय टाउनशिप, कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास और शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो और गैस गोदाम जैसी गतिविधियों पर रोक प्रस्तावित है।

खेती की जमीन पर बड़े व्यावसायिक उपयोग सीमित

कृषि भूमि के लिए भी अलग प्रावधान किया गया है। बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक व्यावसायिक उपयोग, विभिन्न प्रकार के उद्योग, अधिक घनत्व वाली आवासीय योजनाएं और बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को सीमित करने का प्रस्ताव है। सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन और मनोरंजन से जुड़े भूमि उपयोग क्षेत्रों में भी असंगत तथा अत्यधिक भारी गतिविधियों को रोकने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

निवेशकों को मिल सकता है अधिक स्पष्ट माहौल

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से निवेशकों को यह पहले से स्पष्ट रहेगा कि किसी क्षेत्र में कौन-से काम प्रतिबंधित हैं। इससे अनुमति प्रक्रिया को समझने में आसानी होगी और परियोजनाओं की योजना बनाने में भी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही शहरों और कस्बों में आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना की बदलती मांग को पूरा करने के लिए भूमि उपयोग को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।

ओपी चौधरी ने कहा कि यह पहल विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप डीरिगुलेशन और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में राज्य के नीतिगत सुधारों का हिस्सा है। उनका कहना है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विकास को आसान बनाने के लिए विभाग लगातार नियमों की समीक्षा कर रहा है।

अंतिम फैसला सुझावों के बाद

भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित संशोधन पर आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से आपत्ति तथा सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों के भीतर प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग से जुड़ा नियमन अधिक स्पष्ट और लचीला होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य विकास की गति बढ़ाने के साथ पर्यावरण, जनसुरक्षा और नियोजित विकास के बीच संतुलन बनाए रखना है।