शहीद दिवस पर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का शक्ति प्रदर्शन, मजदूर अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का लिया संकल्प

रैली और सभा के माध्यम से श्रमिक हितों, श्रम कानूनों और ठेका श्रमिकों की समस्याओं को उठाया, मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

शहीद दिवस पर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का शक्ति प्रदर्शन, मजदूर अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का लिया संकल्प

भिलाई। भिलाई में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने एक जुलाई शहीद दिवस के अवसर पर रैली और सभा आयोजित कर श्रमिक आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिकों, समर्थकों और शहीद परिवारों ने भाग लिया। इस दौरान मजदूर अधिकारों, श्रम कानूनों और ठेका श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंगलवार को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के श्रमिक और समर्थक सुबह पावर हाउस स्थित छावनी मैदान में एकत्रित हुए। यहां से शहीद परिवारों के साथ भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशन स्थित गोलीकांड स्थल पहुंचकर शहीदों के छायाचित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इसके बाद पावर हाउस से रैली निकाली गई, जिसमें लाल-हरे परिधान पहने महिला एवं पुरुष श्रमिक झंडे और बैनर के साथ शामिल हुए।

रैली के दौरान श्रमिकों ने मजदूर एकता, श्रमिक अधिकारों और विभिन्न मांगों से जुड़े नारे लगाए। यह रैली छावनी चौक होते हुए एसीसी चौक पहुंची, जहां आमसभा का आयोजन किया गया। सभा शुरू होने से पहले शहीद शंकर गुहा नियोगी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मौन श्रद्धांजलि दी गई।

सभा को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के विभिन्न पदाधिकारियों और वक्ताओं ने श्रमिक आंदोलनों के इतिहास, मजदूरों के अधिकारों और संगठन की संघर्ष यात्रा पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों की जायज मांगों और अधिकारों के लिए आंदोलन का सिलसिला लगातार जारी रहेगा तथा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई जाती रहेगी।

सभा में संगठन की ओर से श्रम कानूनों में किए गए संशोधनों, ठेका श्रमिकों की स्थिति और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों से जुड़े मुद्दे उठाए गए। वक्ताओं ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर ठेका श्रमिकों को आर्थिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी शिकायत संबंधित विभागों में की गई है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में श्रम कानूनों में हुए संशोधनों को वापस लेने तथा कंपनियों में श्रम संबंधी नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई।

सभा का संचालन तुलसी देवदास, रमाकांत बंजारे और पूनाराम साहू ने किया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत जनगीतों की प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें श्रमिक आंदोलन और सामाजिक जागरूकता से जुड़े संदेश दिए गए।