2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य कठिन, बड़े बदलाव की जरूरत: सोनम वांगचुक
पड़ोसी देशों की प्रगति का हवाला देकर बोले- सही नेतृत्व चुनने के लिए शांतिपूर्ण परिवर्तन आवश्यक
नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक ने भारत के विकास मॉडल और नेतृत्व व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहीं, तो वर्ष 2047 तक भारत का विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा। वांगचुक ने प्रति व्यक्ति आय और पड़ोसी देशों की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुरुवार देर रात जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि हाल के दिनों में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें लंबे समय तक विश्राम करना पड़ा, जिसके दौरान उन्होंने देश के भविष्य और विकास की दिशा पर गहन विचार किया। उनके अनुसार भारत को केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि नेतृत्व, शिक्षा और शासन व्यवस्था में भी मूलभूत सुधार की आवश्यकता है।
पड़ोसी देशों की प्रगति का हवाला
वांगचुक ने कहा कि कुछ दशक पहले तक भारत के बराबर या पीछे माने जाने वाले कई देश आज आर्थिक और सामाजिक संकेतकों में आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को 2047 तक सम्मानजनक वैश्विक स्थिति बनाए रखने के लिए निर्णायक परिवर्तन करने होंगे।
राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत
उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन से जुड़ी चुनौतियों को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं किया जा सकता। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में भी असहमति की आवाजों को दबाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उनके अनुसार 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद सत्ता परिवर्तन तो हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार और अन्याय जैसी समस्याएं समाप्त नहीं हुईं, बल्कि कई मामलों में उनका स्वरूप और अधिक जटिल हो गया।
निस्वार्थ और चरित्रवान नेतृत्व की अपील
वांगचुक ने देश को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता जताई। उन्होंने शांतिपूर्ण परिवर्तन का आह्वान करते हुए लोगों से अपने-अपने क्षेत्र से ऐसे व्यक्तियों के नाम सुझाने की अपील की, जो निस्वार्थ, निडर, चरित्रवान और सक्षम हों। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से मिलकर देश के भविष्य की नई रूपरेखा तैयार करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
शिक्षा सुधार को बताया विकास की कुंजी
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को देश की प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि जब तक शिक्षा प्रणाली मजबूत नहीं होगी, तब तक विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा रहेगा। उनके अनुसार केवल नेतृत्व परिवर्तन पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और संस्थागत ढांचे में भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं।
हाल ही में समाप्त की थी भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक ने 28 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और छात्रों के मुद्दों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में सरकारी आश्वासन मिलने पर उन्होंने 24 जुलाई को अपना अनशन समाप्त किया।
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