झीरम फैसले के बाद दिल्ली में कांग्रेस की बैठक, राहुल गांधी से मिलेंगे छत्तीसगढ़ के नेता

पीड़ित परिवार भी होंगे शामिल, झीरम मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और परिवारों की मांगों पर हो सकता है मंथन

झीरम फैसले के बाद दिल्ली में कांग्रेस की बैठक, राहुल गांधी से मिलेंगे छत्तीसगढ़ के नेता

रायपुर। झीरम घाटी मामले में अदालत का फैसला आने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पीड़ित परिवारों के सदस्य दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। 10 जनपथ में प्रस्तावित बैठक में झीरम मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं, पीड़ित परिवारों की मांगों और अदालत के फैसले के बाद आगे की प्रक्रिया पर चर्चा होने की संभावना है। सोनिया गांधी के भी बैठक में शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।


 
झीरम घाटी मामले को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं की राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बैठक होने जा रही है। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के शामिल होने की जानकारी है। इनके साथ झीरम हमले से प्रभावित परिवारों के सदस्य भी बैठक में मौजूद रह सकते हैं।

कर्मा परिवार और उमेश पटेल के परिवार से जुड़े सदस्यों के बैठक में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। बैठक में सोनिया गांधी के भी उपस्थित रहने की संभावना है।

फैसले के बाद बदला कानूनी परिदृश्य

झीरम घाटी मामले में 5 सितंबर को विशेष एनआईए अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। यह फैसला 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी हमले के करीब 13 साल बाद आया।

हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित 29 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे।

परिवारों के मुद्दों पर भी बात

बैठक में पीड़ित परिवारों की लंबित मांगों और मामले से जुड़े अन्य मुद्दों को राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखा जा सकता है। अदालत के फैसले के बाद अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी, इस पर भी चर्चा संभावित है।

हाईकोर्ट में अपील का विकल्प

विशेष अदालत के फैसले के बाद दोषियों के लिए उच्च न्यायालय में अपील का रास्ता खुला है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मृत्युदंड पाए दोषियों को अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। ऐसे में दिल्ली की बैठक को आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार-विमर्श के लिहाज से देखा जा रहा है।