अधिवक्ता बलबीर कौर की मौत पर प्रशासन सख्त, अस्पताल की भूमिका की जांच शुरू होगी

परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया था आरोप, वकीलों के प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद कलेक्टर का फैसला; चार सदस्यीय समिति को 15 दिन की मोहलत

अधिवक्ता बलबीर कौर की मौत पर प्रशासन सख्त, अस्पताल की भूमिका की जांच शुरू होगी

दुर्ग-भिलाई। महिला अधिवक्ता बलबीर कौर (चौहान) की मौत के मामले में स्मृति नगर के हाईटेक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की कार्यप्रणाली अब प्रशासनिक जांच के दायरे में होगी। इलाज के दौरान 1 नवंबर को हुई उनकी मौत के बाद उठे सवालों पर कलेक्टर ने चार सदस्यीय जांच दल नियुक्त किया है। समिति को अस्पताल में हुए उपचार और घटना से संबंधित सभी पहलुओं की पड़ताल कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उपचार में लापरवाही बरती गई और मरीज की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी भी सही तरीके से नहीं दी गई। इस मामले को लेकर जिला अधिवक्ता संघ ने मोर्चा खोल दिया था। बड़ी संख्या में वकील अस्पताल पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान जिम्मेदार चिकित्सकों पर एफआईआर, अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की गई थी।

चार सदस्यीय टीम करेगी पूरे मामले की पड़ताल

कलेक्टर के निर्देश पर गठित समिति की कमान अपर कलेक्टर वीरेन्द्र सिंह को सौंपी गई है। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी, जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता सिन्हा और जनरल सर्जन डॉ. सरिता मिंज को समिति में शामिल किया गया है। जांच दल को मामले से जुड़े चिकित्सा संबंधी तथ्यों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट के साथ आवश्यक सुझाव भी देने होंगे।

अधिवक्ता संघ ने उठाया था मामला

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने बताया कि महिला अधिवक्ता की मौत के बाद संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। संघ का कहना है कि मामले की वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन की ओर से जांच समिति बनाए जाने के बाद अब सभी की निगाहें उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।

अस्पताल का पक्ष : ऑपरेशन के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

मामले में अस्पताल प्रबंधन ने किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. नवील शर्मा के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। स्थिति को देखते हुए एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ने तत्काल ऑपरेशन रुकवा दिया। चिकित्सकों को पल्मोनरी एम्बोलिज्म की आशंका हुई, जिसमें फेफड़ों की रक्त वाहिका में खून का थक्का जम जाता है। मरीज को बचाने के लिए सीपीआर, दवाइयों और आईसीयू में विशेषज्ञों की मदद से उपचार किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगे की कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण हो गई है। समिति की जिम्मेदारी है कि वह उपचार से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड की समीक्षा कर निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचे। 15 दिनों में रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।