फर्जी कॉल से लेकर डिजिटल गिरफ्तारी तक, छात्राओं को बताए साइबर ठगी के नए तरीके

स्मृतिनगर पुलिस का छात्रावासों में अभियान, 150 से 200 छात्राओं और स्टाफ को समझाया ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव का तरीका

फर्जी कॉल से लेकर डिजिटल गिरफ्तारी तक, छात्राओं को बताए साइबर ठगी के नए तरीके

साइबर अपराधी अब केवल बैंक संबंधी जानकारी के नाम पर ही नहीं, बल्कि पुलिस कार्रवाई, नौकरी, कर्ज और इनाम का झांसा देकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों से छात्राओं को बचाने के लिए स्मृतिनगर पुलिस ने दो कन्या छात्रावासों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को बताया कि अनजान व्यक्ति के साथ गोपनीय जानकारी साझा करना या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

रायपुर। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीके भी बदल रहे हैं। साइबर अपराधी लोगों को मानसिक दबाव में लेकर बैंक खातों से रकम निकालने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रहे हैं। इस तरह के अपराधों से बचाव के लिए स्मृतिनगर पुलिस ने छात्रावासों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर छात्राओं को सतर्क रहने की जानकारी दी।

पोस्ट मैट्रिक स्नातकोत्तर अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास और पोस्ट मैट्रिक अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास में आयोजित कार्यक्रम में करीब 150 से 200 छात्राओं और स्टाफ ने हिस्सा लिया। एसआई बसंत पटेल ने बताया कि ठग फर्जी पहचान बनाकर लोगों को फोन करते हैं और बैंक खाता बंद होने, नौकरी लगने, लोन मिलने या दस्तावेजों में गड़बड़ी का हवाला देकर जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने बताया कि कुछ साइबर अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ करने और घर से बाहर नहीं निकलने की धमकी देकर पैसे वसूलने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसी किसी भी परिस्थिति में घबराने के बजाय संबंधित जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

ओटीपी और पासवर्ड साझा करना पड़ सकता है भारी

पुलिस ने छात्राओं को समझाया कि बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए। ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी, पासवर्ड और मोबाइल बैंकिंग से संबंधित विवरण साझा करने से खाते में जमा रकम खतरे में पड़ सकती है।

इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड करना, संदिग्ध लिंक खोलना या अपरिचित लोगों की वीडियो कॉल स्वीकार करना भी जोखिम भरा हो सकता है। पुलिस ने छात्राओं से कहा कि किसी भी फोन कॉल पर दबाव बनाकर जानकारी मांगी जाए तो सतर्क हो जाएं।

शिकायत में देरी से बढ़ सकता है नुकसान

साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने की जरूरत पर जोर देते हुए पुलिस ने 1930 हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ठगी का पता चलते ही इस नंबर पर शिकायत करें और संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचित करें। समय रहते शिकायत करने से धोखाधड़ी की रकम को आगे जाने से रोकने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी बताई गई।

जागरूकता को परिवार तक पहुंचाने की अपील

कार्यक्रम में छात्राओं ने ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी संदेश और संदिग्ध कॉल से जुड़े सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने उदाहरणों के जरिए उन्हें सावधानियां समझाईं। अधिकारियों ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के दूसरे लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करना जरूरी है। छात्राओं से अपील की गई कि वे अपने घर के बुजुर्गों और परिचितों को भी साइबर ठगी के नए तरीकों की जानकारी दें।