एशिया के खेल महाकुंभ में भारत की बड़ी चुनौती

आइची-नागोया में 45 देशों के 43 खेलों के मुकाबले, 501 भारतीय खिलाड़ी उतरेंगे; 314 के लिए पहला एशियन गेम्स अनुभव

एशिया के खेल महाकुंभ में भारत की बड़ी चुनौती

जापान का आइची-नागोया आज से एशिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय खेल आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। एशियन गेम्स के 20वें संस्करण में 45 देशों के खिलाड़ी 43 खेलों में 469 पदक स्पर्धाओं के लिए मुकाबला करेंगे। भारत ने भी इस बार मजबूत दल भेजा है। 501 भारतीय खिलाड़ी 36 खेलों में अपनी चुनौती पेश करेंगे, जिनमें 314 खिलाड़ी पहली बार इस स्तर के खेल आयोजन का हिस्सा बनेंगे।

1951 में दिल्ली से शुरू हुआ सफर

एशियन गेम्स का पहला आयोजन 1951 में नई दिल्ली में हुआ था। तब केवल 11 देशों ने 6 खेलों में भाग लिया था। भारत अब तक दो बार इन खेलों की मेजबानी कर चुका है। एशियाई देशों के बीच सहयोग और आपसी संबंधों को मजबूत करने की सोच ने इस आयोजन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मेल

भारतीय दल में 267 पुरुष और 234 महिला खिलाड़ी हैं। क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी 15 वर्ष की उम्र में दल के सबसे युवा खिलाड़ी हैं। वहीं घुड़सवार श्रुति वोरा 55 वर्ष की उम्र में सबसे उम्रदराज भारतीय खिलाड़ी हैं। एथलेटिक्स में भारत की ओर से 79 खिलाड़ी, हॉकी में 40, क्रिकेट और शूटिंग में 30-30, कबड्डी में 24 तथा रोइंग में 22 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।

256 स्पर्धाओं में भारत की नजर पदकों पर

भारतीय खिलाड़ी 36 खेलों की कुल 256 पदक स्पर्धाओं में उतरेंगे। एथलेटिक्स में सबसे अधिक 43 इवेंट हैं। शूटिंग में 27, कयाकिंग-कैनोइंग में 14, ट्रैक साइकिलिंग में 11 और बैडमिंटन में 7 स्पर्धाएं शामिल हैं। क्रिकेट में महिला और पुरुष दोनों टीमें टी-20 प्रारूप में मुकाबला करेंगी।

खेलों के कार्यक्रम में बड़ा बदलाव

इस संस्करण में छह खेलों को पहली बार मेडल स्पोर्ट के रूप में जगह मिली है। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, पैडल, सर्फिंग, टेकबॉल, वर्चुअल ताइक्वांडो और बीएमएक्स फ्रीस्टाइल इनमें शामिल हैं। दूसरी ओर ड्रैगन बोट, रोलर स्पोर्ट्स और माइंड स्पोर्ट्स इस बार कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं।

ओलिंपिक की राह भी खुलेगी

एशियन गेम्स की कुछ स्पर्धाएं लॉस एंजेलिस 2028 ओलिंपिक की क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से भी जुड़ी हैं। आर्चरी, हॉकी, स्क्वॉश और टेनिस में प्रदर्शन के आधार पर ओलिंपिक क्वालिफिकेशन का रास्ता बन सकता है। स्क्वॉश में पुरुष और महिला सिंगल्स के चैंपियन को ओलिंपिक कोटा मिलने का प्रावधान है। हॉकी में भी चैंपियन टीमों के लिए क्वालिफिकेशन नियमों के तहत कोटा हासिल करने का अवसर रहेगा।

तीन साल की तैयारी पर 703 करोड़ रुपए

भारतीय दल की तैयारी पर नवंबर 2023 से अगस्त 2026 के बीच करीब 703 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसमें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर 252 करोड़, घरेलू प्रशिक्षण और राष्ट्रीय शिविरों पर 118 करोड़, खेल उपकरणों पर 89 करोड़, विदेशी कोच व सपोर्ट स्टाफ पर 86 करोड़ और विदेशी प्रशिक्षण पर 40 करोड़ रुपए खर्च किए गए। 30 खेलों के लिए 50 विदेशी विशेषज्ञों और कोचों की सेवाएं भी ली गईं।

कई बड़े नामों पर रहेंगी निगाहें

स्क्वॉश की अनाहत सिंह, शूटिंग की ईशा सिंह, तीरंदाजी की ज्योति सुरेखा वेन्नम और एथलेटिक्स के गुलवीर सिंह भारतीय उम्मीदों में शामिल हैं। अविनाश साबले और पारुल चौधरी अपने पिछले एशियन गेम्स प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेंगे। लंबी कूद में अंसी सोजन, वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू और कुश्ती में अमन सहरावत भी महत्वपूर्ण भारतीय दावेदारों में हैं।

हांगझोउ में रचा था नया रिकॉर्ड

भारत ने 1951 से 2022 तक एशियन गेम्स में 778 पदक अपने नाम किए हैं। इनमें 183 स्वर्ण, 238 रजत और 357 कांस्य पदक हैं। 2023 में हांगझोउ एशियन गेम्स भारत के लिए ऐतिहासिक रहे, जहां देश ने पहली बार 100 पदकों का आंकड़ा पार किया। भारत ने 28 स्वर्ण, 38 रजत और 40 कांस्य सहित कुल 106 पदक जीते थे।

एथलेटिक्स सबसे आगे

एशियन गेम्स में भारत ने अब तक 34 खेलों में पदक जीते हैं। एथलेटिक्स 283 पदकों के साथ भारत का सबसे बड़ा पदक योगदान देने वाला खेल रहा है। शूटिंग के 80, कुश्ती के 65 और बॉक्सिंग के 61 पदक हैं। व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो पी.टी. उषा ने 11 पदक जीते हैं, जिनमें 4 स्वर्ण और 7 रजत पदक शामिल हैं।