मानसून में बढ़ रहा साइनसाइटिस का खतरा: समय रहते पहचानें लक्षण, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी
नमी, फंगस, एलर्जी और वायरल संक्रमण बन रहे प्रमुख कारण; विशेषज्ञ बोले- शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं कई मौसमी बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। इनमें साइनसाइटिस (साइनस संक्रमण) प्रमुख है, जो नाक और चेहरे के आसपास मौजूद साइनस में सूजन या संक्रमण के कारण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में बढ़ी नमी, फफूंदी, धूल और वायरल संक्रमण इस बीमारी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी करते हैं। समय पर इलाज और सावधानी बरतकर इससे बचाव संभव है।
नई दिल्ली (ए)। मानसून के दौरान वातावरण में बढ़ी नमी और संक्रमण का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। इस मौसम में सर्दी-जुकाम के साथ साइनसाइटिस (साइनस संक्रमण) के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। कान, नाक और गला (ईएनटी) विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर इसे सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर यह गंभीर रूप ले सकता है।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. नईम अहमद सिद्दीकी के अनुसार साइनस चेहरे की हड्डियों के भीतर स्थित हवा से भरी छोटी-छोटी गुहाएं होती हैं, जो सांस की हवा को नम और गर्म रखने, आवाज में गूंज पैदा करने तथा धूल और संक्रमण से शरीर की रक्षा करने का काम करती हैं। जब इनमें सूजन या संक्रमण हो जाता है, तो इसे साइनसाइटिस कहा जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य स्थिति में साइनस के भीतर केवल हवा रहती है, लेकिन एलर्जी, वायरल संक्रमण या बैक्टीरिया के कारण इनमें बलगम भरने लगता है। बलगम के जमा होने से संक्रमण बढ़ता है और नाक बंद होना, चेहरे में दर्द, सिरदर्द, भारीपन तथा लगातार जुकाम जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।
मानसून में क्यों बढ़ता है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से नाक के भीतर अधिक बलगम बनने लगता है। इसके अलावा सीलन के कारण फफूंदी और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो संक्रमण और एलर्जी का जोखिम बढ़ाते हैं। धूल, परागकण और फंगस के कण भी इस मौसम में अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे साइनस ब्लॉक होने की आशंका बढ़ जाती है।
बार-बार होने वाला वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम तथा एयर कंडीशनर और बाहरी वातावरण के तापमान में लगातार बदलाव भी साइनस को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि मानसून में पहले से एलर्जी या साइनस की समस्या से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नाक लगातार बंद रहे, चेहरे या माथे में दर्द महसूस हो, सिरदर्द बना रहे, गाढ़ा बलगम निकले, सूंघने की क्षमता कम हो जाए या बुखार के साथ ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। समय पर इलाज नहीं मिलने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां
डॉक्टरों की सलाह है कि मानसून में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, घर में सीलन और फफूंदी न पनपने दें, धूल और धुएं से बचें, पर्याप्त पानी पिएं तथा सर्दी-जुकाम होने पर लापरवाही न करें। जिन लोगों को एलर्जी या बार-बार साइनस की समस्या होती है, उन्हें मौसम बदलने के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी भी दवा का सेवन चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर उपचार और उचित सावधानियां अपनाकर मानसून में साइनसाइटिस के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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