सूखी जमीन को रातों-रात बना दिया सिंचित, अधिकारियों ने किया 300 करोड़ का घोटाला

सूखी जमीन को रातों-रात बना दिया सिंचित, अधिकारियों ने किया 300 करोड़ का घोटाला

अधिकारियों ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर सूखी और असिंचित जमीन को रातों-रात सिंचित दिखा दिया, जिससे सरकारी योजनाओं और मुआवजा मद में करीब 300 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई है।

रायगढ़ जिले के बजरमुड़ा में एक बड़ा भूमि मुआवजा घोटाला सामने आया है। छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन कंपनी को आवंटित कोल ब्लॉक के लिए भू-अर्जन और मुआवजा वितरण में तत्कालीन अधिकारियों ने मिलकर कंपनी को 300 करोड़ रुपए से अधिक का चूना लगाया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, साल 2011 में जहां पूरे 5 गांवों का कुल मुआवजा 78.69 करोड़ रुपए तय किया गया था, वहीं साल 2021 में दोबारा अवार्ड पारित होने पर अकेले बजरमुड़ा ग्राम का मुआवजा बढ़कर 400 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया।

 78 करोड़ 69 लाख से अधिक मुआवजा पारित

गारे-पेलमा सेक्टर-3 कोल ब्लॉक (बजरमुड़ा) पूर्व में मेसर्स गोवा इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को आवंटित था। 23 मार्च 2011 को राजस्व विभाग ने इसके अंतर्गत आने वाले पांचों प्रभावित गांवों में बजरमुड़ा, करवाही, मिलुपारा, ढोलनारा और खम्हरिया का कुल मुआवजा 78 करोड़ 69 लाख से अधिक पारित किया था। इसमें अकेले बजरमुड़ा का हिस्सा 34 करोड़ 20 लाख के आसपास था था। बाद में यह कोल ब्लॉक इस कंपनी से छिन गया और साल 2017 से इसे छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन को आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

साल 2018 में छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन को सतही अधिकार मिले और 2021 में जब नया अवार्ड पारित हुआ, तो नियमों को ताक पर रख दिया गया। नए अवार्ड में केवल बजरमुड़ा ग्राम के लिए 32 करोड़ 27 लाख से अधिक की राशि तय की गई। इसमें प्रोसेसिंग फीस और ब्याज की गणना जोड़कर छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन कंपनी से 47 करोड़ 78 लाख से अधिक की भारी-भरकम डिमांड की गई। इस तरह ब्याज की राशि मिलाकर 300 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त अवार्ड पारित कर मुआवजा बांट दिया गया।

सूखी जमीन को रातों-रात बना दिया सिंचित

राज्य स्तरीय टीम द्वारा की गई पूर्व जांच में यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने बड़ी हेराफेरी की थी। क्षेत्र में बिना किसी सिंचाई संसाधन के, एक-फसली (असिंचित) भूमि को दस्तावेजों में दो-फसली (सिंचित) दर्शा दिया गया। बजरमुड़ा की कुल 178 हेक्टेयर प्रभावित भूमि में से 128 हेक्टेयर भूमि को फर्जी तरीके से सिंचित बताकर मुआवजे की रकम को कई गुना बढ़ा दिया गया। हालांकि, जिला प्रशासन ने अभी तक गड़बड़ी की सटीक राशि का अंतिम आकलन नहीं किया है, लेकिन रिकॉर्ड के आधार पर 300 करोड़ से अधिक का घोटाला साफ प्रमाणित हो रहा है।

वर्जन

इस पूरे मामले की शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच की जा चुकी है। शासन की ओर से प्रभावित भूमि और मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके आधार पर वर्तमान में पुनर्मूल्यांकन का कार्य कराया जा रहा है।

-दुर्गा प्रसाद अधिकारी, एसडीएम, घरघोड़ा