DMF घोटाले की जांच तेज: छत्तीसगढ़ में कारोबारी, ठेकेदार और कांग्रेस नेता से जुड़े ठिकानों पर ED की दबिश
रायपुर, धमतरी, सरगुजा समेत कई जिलों में कार्रवाई, दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड खंगाले
रायपुर/धमतरी। जिला खनिज न्यास (DMF) फंड में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के कई जिलों में एक साथ छापेमार कार्रवाई की। जांच एजेंसी की टीमों ने रायपुर, धमतरी, सरगुजा, दुर्ग, महासमुंद सहित विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर कारोबारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों के ठिकानों की तलाशी ली।
रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास, सरगुजा में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता की फर्म मानसून एग्रो तथा धमतरी के आमापारा वार्ड स्थित ठेकेदार दीपेश गांधी के घर पर ईडी की टीम ने दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की।
सूत्रों के अनुसार, सरगुजा में कृषि सामग्री आपूर्ति से जुड़े कारोबारी राकेश गुप्ता की फर्म के पुराने लेनदेन, सरकारी विभागों को की गई सप्लाई तथा संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की गई। वहीं धमतरी में जांच अधिकारियों ने ठेकेदार दीपेश गांधी के आवास पर कई घंटों तक रिकॉर्ड खंगाले और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान डिजिटल उपकरणों और मोबाइल फोन की भी जांच की गई। जांच एजेंसी विशेष रूप से वित्तीय लेनदेन, अनुबंधों और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड पर फोकस कर रही है।
क्या है DMF मामला
जिला खनिज न्यास (DMF) खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए गठित एक विशेष फंड है। जांच एजेंसियों के अनुसार कोरबा जिले में DMF फंड से जुड़े विभिन्न टेंडरों के आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और पक्षपातपूर्ण लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं।
प्राथमिक जांच में यह भी आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल कुछ कारोबारी, ठेकेदार और बिचौलियों ने मिलकर आर्थिक लाभ अर्जित किया। मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने भी आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
कमीशनखोरी के आरोपों की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ ठेकों में कथित तौर पर 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन दिए जाने के संकेत मिले हैं। आरोप है कि इन भुगतानों को विभिन्न माध्यमों से दर्शाकर वास्तविक लेनदेन को छिपाने की कोशिश की गई। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और जब्त दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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