आमानाका चौपाटी में अवैध शराब बिक्री का वीडियो वायरल, बोरी में भरकर बेचते दिखे युवक
कांग्रेस का आरोप— असामाजिक तत्वों का अड्डा बन रहा चौपाटी क्षेत्र, कार्रवाई की उठी मांग
रायपुर। शहर के आमानाका ओवरब्रिज के नीचे बनाई गई नई चौपाटी शुरू होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में कुछ युवक बोरी में भरकर शराब बेचते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि चौपाटी के लिए बनाई गई दुकानों के आसपास ही यह अवैध गतिविधि संचालित की जा रही थी।
वीडियो में कुछ युवक बोरी से शराब की बोतलें निकालकर ग्राहकों को देते नजर आ रहे हैं, वहीं कई लोग वहां आकर शराब खरीदते भी दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि आमानाका चौपाटी असामाजिक तत्वों का अड्डा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र में कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है। कांग्रेस ने अवैध शराब बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल, एनआईटी चौपाटी को 21 नवंबर 2025 को भारी विरोध और हंगामे के बीच आमानाका इलाके में स्थानांतरित किया गया था। उस समय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझटकी भी हुई थी और कई लोगों को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेजा गया था।
पुरानी चौपाटी हटाने के बाद नई जगह पर व्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी है, जिससे दुकानदारों में भी नाराजगी बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि चौपाटी को शिफ्ट करने का निर्णय जल्दबाजी और राजनीतिक दबाव में लिया गया।
कुछ दिन पहले यह मामला तब और गरमा गया था, जब युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधायक राजेश मूणत के पोस्टर पर कालिख पोत दी थी। इस घटना के बाद पुलिस ने युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। विरोध में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने सरस्वती नगर थाने का घेराव भी किया था।
कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि चौपाटी निर्माण और स्थानांतरण से जुड़े फैसलों की भी समीक्षा की जानी चाहिए। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों ने पहले चौपाटी को अनुमति दी और बाद में उसे अवैध बताया, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि एनआईटी चौपाटी के विकास पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। सरकार बदलने के बाद यहां नालंदा-2 विकसित करने की योजना बनाई गई, जिसके बाद से यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि एक विधायक की जिद के चलते साइंस कॉलेज की चौपाटी को हटाया गया, जिससे वहां व्यवसाय करने वाले कई लोग बेरोजगार हो गए। उन्हें नई चौपाटी में व्यवस्थित करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक व्यवस्था पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है।
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