देशभर के मोबाइल पर एकसाथ बजा अलर्ट सायरन, इमरजेंसी सिस्टम की हुई टेस्टिंग

NDMA ने ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ तकनीक से किया परीक्षण, SACHET सिस्टम के जरिए रियल टाइम चेतावनी की तैयारी

देशभर के मोबाइल पर एकसाथ बजा अलर्ट सायरन, इमरजेंसी सिस्टम की हुई टेस्टिंग

*शनिवार सुबह देशभर में करोड़ों मोबाइल फोन पर अचानक सायरन की आवाज और अलर्ट संदेश पहुंचने से लोग कुछ देर के लिए हैरान रह गए। हालांकि यह किसी आपदा की चेतावनी नहीं, बल्कि सरकार द्वारा इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम की व्यापक टेस्टिंग थी, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।*

 

नई दिल्ली (ए)। देशभर में शनिवार सुबह करीब 11:45 बजे एक साथ लाखों-करोड़ों मोबाइल फोन पर सायरन बजने और अलर्ट मैसेज आने से लोगों में हलचल मच गई। मोबाइल स्क्रीन पर हिंदी और अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में संदेश दिखाई दिया, जिसे बाद में ऑडियो के रूप में भी सुनाया गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से कुछ लोग घबरा गए, जबकि कई लोग इसे लेकर असमंजस में नजर आए।

दरअसल, यह अलर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा इमरजेंसी चेतावनी प्रणाली की जांच के तहत भेजा गया था। इस परीक्षण का उद्देश्य किसी भी आपदा या आपात स्थिति में लोगों तक त्वरित सूचना पहुंचाने की व्यवस्था को परखना था।

परीक्षण के तहत देश के सभी राज्यों की राजधानियों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ मोबाइल उपयोगकर्ताओं को यह संदेश भेजा गया। अलर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि यह केवल एक ट्रायल है और इस पर किसी तरह की कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है।

सरकार ने पहले ही लोगों को इस टेस्टिंग के बारे में सूचित कर दिया था और अपील की थी कि इस तरह के अलर्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। यह अभ्यास आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए किया गया।

आपातकालीन स्थितियों में रियल टाइम सूचना देने के लिए ‘SACHET’ नामक इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम विकसित किया गया है, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) ने तैयार किया है। यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है और देशभर के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा चुका है।

इस तकनीक में ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिसके माध्यम से किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ संदेश भेजा जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह इंटरनेट के बिना भी काम करता है और आपदा के समय तुरंत चेतावनी देने में सक्षम है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस सिस्टम के जरिए अब तक 19 से अधिक भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा अलर्ट संदेश भेजे जा चुके हैं। इसका उपयोग मौसम परिवर्तन, बाढ़, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी देने में किया जा रहा है।

इस पहल से स्पष्ट है कि सरकार भविष्य में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग कर रही है, ताकि समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके और जनहानि को कम किया जा सके।