‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने सोशल मीडिया पर मचाई हलचल, 5 दिन में इंस्टाग्राम पर बीजेपी-कांग्रेस से आगे
चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ व्यंग्यात्मक ऑनलाइन कैंपेन; युवाओं की नाराजगी और बेरोजगारी बना बड़ा मुद्दा
*सोशल मीडिया पर शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का व्यंग्यात्मक अभियान इन दिनों तेजी से चर्चा में है। महज पांच दिनों में इस प्लेटफॉर्म ने इंस्टाग्राम पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटाकर बीजेपी और कांग्रेस जैसे बड़े दलों को भी पीछे छोड़ दिया है। युवाओं की बेरोजगारी, सिस्टम से नाराजगी और इंटरनेट संस्कृति के मेल से पैदा हुए इस अभियान को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है।*
नई दिल्ली (ए)। देश की राजनीति और सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। इंस्टाग्राम पर कुछ ही दिनों में करोड़ों फॉलोअर्स हासिल करने वाले इस व्यंग्यात्मक ऑनलाइन कैंपेन ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की डिजिटल मौजूदगी को चुनौती दे दी है।
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद इस अभियान की शुरुआत हुई। बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अगले ही दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक ऑनलाइन कैंपेन लॉन्च किया गया, जिसने देखते ही देखते युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल कर ली।
इस प्लेटफॉर्म ने खुद को एक व्यंग्यात्मक और गैर-पंजीकृत राजनीतिक संगठन बताया है। इंस्टाग्राम और X पर शुरू हुए इसके अभियान में युवाओं से ‘कॉकरोच’ इमोजी लगाने और कैंपेन से जुड़ने की अपील की गई। सोशल मीडिया पर मीम, रील और ट्रेंडिंग हैशटैग के जरिए यह अभियान तेजी से वायरल हुआ।
CJP के संस्थापक के रूप में सामने आए 30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले हैं। वे डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रह चुके हैं और पहले आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया कैंपेन से भी जुड़े रहे हैं। फिलहाल वे अमेरिका में पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत का कहना है कि यह अभियान युवाओं के भीतर लंबे समय से जमा नाराजगी और निराशा की अभिव्यक्ति है।
सोशल मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि CJP की लोकप्रियता के पीछे युवाओं से जुड़ी कंटेंट स्ट्रैटेजी, बेरोजगारी और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर बढ़ती नाराजगी बड़ी वजह है। NEET पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और नौकरी संकट जैसे मुद्दों ने इस अभियान को तेजी से समर्थन दिलाया।
हालांकि, CJP फिलहाल कोई आधिकारिक राजनीतिक पार्टी नहीं है और न ही चुनाव आयोग में इसका पंजीकरण हुआ है। इसके बावजूद यह अभियान इंटरनेट पर युवाओं की भावनाओं और राजनीतिक असंतोष का बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भले ही व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ हो, लेकिन इसने युवाओं के भीतर मौजूद असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है।
इसी बीच CJP के X अकाउंट पर अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद यह अभियान और अधिक चर्चा में आ गया है। संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे अभिव्यक्ति की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। अब देखना होगा कि यह ऑनलाइन लहर कुछ दिनों की ट्रेंडिंग चर्चा बनकर रह जाती है या भविष्य में किसी बड़े सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन का रूप लेती है।
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