महिला आरक्षण पर सियासत तेज: अरुण वोरा का भाजपा पर हमला, ‘अधिकारों में देरी बर्दाश्त नहीं’

कांग्रेस नेता बोले—परिसीमन के नाम पर टाला जा रहा कानून; महिलाओं को बिना शर्त मिले आरक्षण

महिला आरक्षण पर सियासत तेज: अरुण वोरा का भाजपा पर हमला, ‘अधिकारों में देरी बर्दाश्त नहीं’

दुर्ग, 20 अप्रैल 2026। महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दुर्ग शहर के पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है।

वोरा ने आरोप लगाया कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” को कानून का रूप दिए जाने के बावजूद उसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रियाओं से जोड़कर लागू करने में देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को बिना किसी शर्त के आरक्षण देने की पक्षधर रही है और इस मुद्दे पर उसकी नीति स्पष्ट रही है।

उन्होंने कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व ने महिलाओं को सशक्तिकरण की दिशा में नई पहचान दी। इसके बाद राजीव गांधी ने पंचायत और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की पहल की, जिसे बाद में कानून का रूप दिया गया।

वोरा ने कहा कि पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में लागू 73वें और 74वें संविधान संशोधनों ने स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत किया, जिसके परिणामस्वरूप आज लाखों महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। वहीं, मनमोहन सिंह सरकार ने भी संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए थे।

उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है, जबकि यह महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार बिना किसी शर्त, देरी या राजनीतिक स्वार्थ के तुरंत मिलना चाहिए।

वोरा ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर राजनीति नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और स्पष्ट नीयत की आवश्यकता है।