एक कमरे में सिमटी छह कक्षाएं, सात साल से भवन के इंतजार में सरसेनी का प्राथमिक स्कूल

बालवाड़ी से पांचवीं तक 41 बच्चे एक ही कक्ष में पढ़ने को मजबूर, अतिरिक्त कक्ष की मांग कागजों में उलझी; जांच में अधिकारियों ने स्कूल के अस्तित्व पर ही जताया भ्रम

एक कमरे में सिमटी छह कक्षाएं, सात साल से भवन के इंतजार में सरसेनी का प्राथमिक स्कूल

बिलासपुर। शहर से करीब 13 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लॉक के ग्राम सरसेनी स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में संसाधनों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय का पुराना भवन जर्जर होने के बाद वर्ष 2019 से पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं एक ही कमरे में संचालित की जा रही हैं। नए शिक्षा सत्र में बालवाड़ी को भी इसी कक्ष में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे अब एक ही कमरे में छह अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई कराई जा रही है।

विद्यालय में वर्तमान में 41 विद्यार्थी दर्ज हैं। बैठने की व्यवस्था इस तरह की गई है कि पहली कतार में बालवाड़ी, उसके बाद क्रमशः पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी और सबसे पीछे पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी बैठते हैं। एक शिक्षक जब किसी एक कक्षा को पढ़ाते हैं तो बाकी कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है, जिससे शिक्षण व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

विद्यालय में केवल दो शिक्षक—प्रधानपाठक निर्मल कौशिक और शिक्षिका पूनम पोर्ते—पूरे स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सीमित संसाधनों और एक ही कक्ष में सभी बच्चों को पढ़ाने की चुनौती के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना कठिन होता जा रहा है।

प्रधानपाठक और ग्राम सरपंच सहोरी राम खैरवार ने बताया कि अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए कई बार विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जनपद पंचायत, कलेक्टर कार्यालय और क्षेत्रीय विधायक को लिखित आवेदन दिए गए। यहां तक कि सुशासन शिविर में भी इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।

सबसे हैरानी की बात यह रही कि आवेदन की जांच के दौरान अधिकारियों ने अभिलेखों में यह मान लिया कि संबंधित स्थान पर विद्यालय ही अस्तित्व में नहीं है। इसी भ्रम के आधार पर अतिरिक्त कक्षों की मांग को निरस्त कर दिया गया। इससे ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन में नाराजगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में नए कक्षों की सबसे अधिक आवश्यकता है, लेकिन पिछले दो वर्षों में अतिरिक्त कक्ष बनाने के बजाय दो शौचालयों का निर्माण कराया गया और एक अन्य शौचालय निर्माण की भी तैयारी की जा रही है। उनका आरोप है कि मूलभूत शैक्षणिक आवश्यकता की अनदेखी की जा रही है।

इस संबंध में पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी के. बैरागी ने कहा कि वे निरीक्षण पर गए होंगे, लेकिन उन्हें पूरा मामला याद नहीं है। वहीं वर्तमान बीईओ दीपक गुप्ता का कहना है कि जैसे ही भवन निर्माण की स्वीकृति प्राप्त होगी, अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।