एक कमरे में ही था बेडरूम, किचन और बाथरूम’, दंगों में हो गई थी फैक्ट्री खत्म, कॉमेडियन राजीव ठाकुर का छलका दर्द

स्टैंडअप कमेडियन राजीव ठाकुर अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार एक कमरे के घर में रहता था और वो सालों तक बहुत गरीबी में रहा, बहुत कुछ सहा।

एक कमरे में ही था बेडरूम, किचन और बाथरूम’, दंगों में हो गई थी फैक्ट्री खत्म, कॉमेडियन राजीव ठाकुर का छलका दर्द

ग्रेट इंडियन कपिल शो' में अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर राजीव ठाकुर हाल ही में वैभव मुंजाल के पॉडकास्ट में नजर आये। बातचीत के दौरान वो अपने बचपन के मुश्किल दिनों को याद करते हुए इमोशनल हो गए। उन्होंने बताया कि वो अपने शुरुआती और संघर्ष के दिनों के बारे में बात करना पसंद नहीं करते हैं क्योंकि उस दौर की उनकी यादें आज भी दर्दनाक हैं। गरीबी से झूझते अपने बचपन के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उनका पूरा परिवार एक कमरे में अपना गुजर-बसर करता था। आइए जानते हैं राजीव ठकुरर ने और क्या कुछ कहा।

‘मैं उस दौर को याद भी नहीं करना चाहता

’एक कमरे के घर में बड़े होने, सिर्फ एक 40-वाट के बल्ब की रोशनी में पढ़ाई करने और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सफलता पाने से पहले बहुत कम साधनों में गुज़ारा करने के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि बचपन की यादें आज भी उनकी आंखों में आंसू ले आती हैं। उन्होंने कहा, “मेरा सफर ऐसे हालात में शुरू हुआ जिन्हें मैं याद भी नहीं करना चाहता। अगर मैं आज लोगों को इसके बारे में बताऊं, तो उनको ये मनगढ़ंत लग सकता है क्योंकि इसे सच साबित करने वाला कोई नहीं है। लोग अक्सर कहते हैं कि आपको अपने दर्द को स्टैंड-अप कॉमेडी में बदलना चाहिए। मैं कभी-कभी ऐसा करता भी हूं, लेकिन उन जोक्स को परफॉर्म करते समय भी दर्द इतना असली होता है कि मैं बैकस्टेज रोने लगता हूं। इसीलिए मैं अपनी जिंदगी के उस दौर के बारे में कम ही बात करता हूं।”

सब कुछ एक ही कमरे में होता था’

राजीव ठाकुर ने बताया कि माता-पिता की शादी के बाद उनके परिवार की जिंदगी रातों-रात बदल गई। उन्होंने बताया, “यह बिल्कुल पुरानी हिंदी फिल्मों जैसा था। पेरेंट्स की शादी के बाद, मेरे पिता को पुश्तैनी घर से निकाल दिया गया। रातों-रात, वो एक आरामदायक घर से निकलकर एक कमरे के घर में रहने लगे। वही एक कमरा हमारा बेडरूम, लिविंग रूम, किचन और यहां तक कि बाथरूम भी था। वहीं, तीन बच्चे पैदा हुए और पले-बढ़े। अगर एक व्यक्ति नहा रहा होता, तो बाकी चार लोगों को बाहर इंतजार करना पड़ता था। मुझे लगता था कि हमारा घर पब्लिक टॉयलेट जैसा है।”

1984 के दंगों के दौरान बर्बाद हो गई थी पिता की फैक्ट्री

कॉमेडियन ने बताया कि अमृतसर में उनके पिता की धागे की फैक्ट्री थी, जो 1984 के दंगों के दौरान बर्बाद हो गई थी, जिससे परिवार के पास कमाई का कोई जरिया नहीं बचा था। उन्होंने कहा, “मेरे पिता बेरोजगार थे। हम किराया भी नहीं दे पाते थे। कमरे में सिर्फ एक 40-वाट का बल्ब था। मुझे पीली रोशनी से नफरत थी क्योंकि मैंने कभी ट्यूबलाइट नहीं देखी थी। जब भी मैं किसी के घर जाता और सफेद रोशनी देखता, तो सोचता कि हमारे घर में ऐसी रोशनी कब आएगी।”

बिजली के इस्तेमाल पर भी थीं पाबंदियां

इसके आगे उन्होंने बताया, “मकान मालिक रात 9 बजे लाइट बंद कर देता था क्योंकि बिजली का खर्च किराए में ही शामिल था। उसके बाद, हमें या तो सोना पड़ता था या फिर मिट्टी के तेल वाले दीये की रोशनी में बैठना पड़ता था।”

पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें हैरानी होती है कि वह कितनी दूर आ गए हैं।

कभी-कभी मुझे लगता है कि मैंने अपनी कल्पना से कहीं ज्यादा हासिल कर लिया है। लेकिन फिर जब आप आस-पास देखते हैं, तो लगता है कि कोई और आगे निकल गया है। शायद जिंदगी का यही दस्तूर है।”

राजीव ठाकुर ने मनोरंजन की दुनिया में अपना करियर बनाने के लिए मुंबई आने से पहले, अमृतसर में कपिल शर्मा और चंदन प्रभाकर के साथ अपने कॉमेडी सफर की शुरुआत की थी। इतने सालों में, उन्होंने कई कॉमेडी शो में काम किया है और अब वो 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' का एक जाना-माना चेहरा बन चुके हैं।