पढ़ाई के लिए शिक्षक नहीं, बुनियादी सुविधा के लिए टॉयलेट नहीं; सड़क पर उतरे स्कूली बच्चे
पेंड्रावन में 400 विद्यार्थियों के लिए महज 3 शिक्षक और एक प्राचार्य, चार दिन में मांग पूरी नहीं होने पर फिर चक्काजाम; सेलूद में 2 साल से शौचालय नहीं होने पर 203 बच्चों का प्रदर्शन
दुर्ग। दुर्ग जिले में मंगलवार को शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर दो अलग-अलग स्थानों पर विद्यार्थियों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। पेंड्रावन के स्वामी आत्मानंद स्कूल के करीब 400 छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों की कमी के विरोध में खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर दोबारा चक्काजाम किया। वहीं सेलूद के स्वामी आत्मानंद स्कूल के 203 विद्यार्थियों ने शौचालय और बाउंड्रीवॉल की मांग को लेकर स्कूल में तालाबंदी कर दुर्ग-पाटन मार्ग पर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। दोनों मामलों में विद्यार्थियों ने लंबे समय से समस्याओं के समाधान नहीं होने की बात कही।
पेंड्रावन में चार दिन बाद फिर सड़क पर विद्यार्थी
पेंड्रावन के स्वामी आत्मानंद स्कूल में 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। यहां करीब 400 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए केवल तीन शिक्षक और एक प्राचार्य उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों के अनुसार इतनी कम संख्या में शिक्षकों के कारण नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं और समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पा रहा है।
शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने 21 अगस्त को भी प्रदर्शन किया था। उस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी थीं। विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि जल्द शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन 25 अगस्त तक स्थिति में बदलाव नहीं हुआ। इसके बाद मंगलवार को विद्यार्थियों ने फिर खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।
17 शिक्षकों की जरूरत, अभी केवल तीन शिक्षक
विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में छात्र संख्या के हिसाब से पर्याप्त शिक्षकों की आवश्यकता है। उनका दावा है कि करीब 400 विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए कम से कम 17 शिक्षकों की जरूरत है। मौजूदा व्यवस्था में विषयवार पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
छात्रों ने ओपन स्कूल की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि स्कूल के उपलब्ध शिक्षकों को ओपन स्कूल की जिम्मेदारी भी दी जाती है, जिससे नियमित कक्षाओं के लिए शिक्षक और कम पड़ जाते हैं। विद्यार्थियों ने ओपन स्कूल बंद करने तथा नियमित पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग की।
बारिश में भी डटे रहे, अधिकारियों से दो टूक बात
चक्काजाम के दौरान बारिश के बावजूद विद्यार्थी सड़क पर डटे रहे। मौके पर पहुंचीं धमधा SDOP डॉ. चित्रा वर्मा ने छात्रों से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर केवल कलेक्टर और शिक्षा मंत्री से बात करना चाहते हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि वे पढ़ाई छोड़कर आंदोलन नहीं करना चाहते। उनका उद्देश्य केवल यह है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हों, ताकि उनका पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो सके और परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो।
21 अगस्त को भी हुआ था प्रदर्शन
पेंड्रावन के विद्यार्थियों ने चार दिन पहले भी शिक्षकों की कमी को लेकर मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन किया था। उस समय प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की थी। आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने आंदोलन समाप्त किया था, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने मंगलवार को फिर सड़क पर उतरने का फैसला किया।
सेलूद में टॉयलेट के लिए तालाबंदी और चक्काजाम
दूसरी ओर सेलूद के स्वामी आत्मानंद स्कूल में भी विद्यार्थियों का गुस्सा सड़क पर नजर आया। यहां 6वीं से 8वीं तक पढ़ने वाले 203 छात्र-छात्राओं ने शौचालय और बाउंड्रीवॉल की मांग को लेकर स्कूल के गेट पर तालाबंदी कर दी। इसके बाद विद्यार्थियों ने दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग पर करीब एक घंटे तक चक्काजाम किया।
विद्यार्थियों के मुताबिक स्कूल में पिछले दो वर्षों से शौचालय की सुविधा नहीं है। छात्राओं ने सवाल उठाया कि स्कूल में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं होने पर वे अपनी जरूरत के लिए खुले में कहां जाएंगी। उनका कहना है कि छात्राओं के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा बेहद जरूरी है।
बाउंड्रीवॉल नहीं होने से सुरक्षा को लेकर भी चिंता
विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर में बाउंड्रीवॉल नहीं होने की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि परिसर में खड़ी साइकिलों के टायर बाहर से आने वाले लोग पंचर कर देते हैं। इससे विद्यार्थियों को परेशानी होती है और स्कूल परिसर की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
छात्रा किंजल कुर्रे ने कहा कि स्कूल में छात्राओं के लिए शौचालय की सुविधा होना जरूरी है। लगातार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर विद्यार्थियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
दुर्ग जिले में एक ही दिन सामने आए दोनों मामलों ने स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पेंड्रावन के विद्यार्थी पर्याप्त शिक्षकों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, तो दूसरी ओर सेलूद के बच्चे शौचालय और बाउंड्रीवॉल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है, इसके लिए उन्हें बार-बार आंदोलन न करना पड़े।
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