नेपाल में बाढ़ की तबाही: 289 शव मिले, 1,500 अब भी लापता

नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही; 288 भारतीयों से संपर्क नहीं, 21 को सुरक्षित निकाला गया

नेपाल में बाढ़ की तबाही: 289 शव मिले, 1,500 अब भी लापता

कांठमांडू (ए)। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। अब तक 289 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 1,500 लोगों की तलाश जारी है। प्रभावित इलाकों में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। भारत के 288 नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो सका है, जबकि बाढ़ में फंसे 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने व्यापक तबाही मचा दी। बाढ़ के साथ पहाड़ों से आए मलबे और पानी ने रास्ते में आने वाले मकानों, सड़कों और अन्य ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। आपदा के बाद से लापता लोगों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। करीब 1,500 लोगों की तलाश के लिए सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं।

नेपाल की सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान मलबे में दबे लोगों और नदी के आसपास फंसे नागरिकों को खोजने में जुटे हैं। दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। राहत टीमों का मुख्य फोकस लापता लोगों का पता लगाने और सुरक्षित बचे लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से बाहर निकालने पर है।

288 भारतीयों से संपर्क नहीं

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में मौजूद 288 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 73 लोग त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट से जुड़े हुए हैं। अधिकारियों की ओर से इन लोगों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें से 11 लोगों की पहचान भी हो गई है। बाकी लोगों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क की प्रक्रिया जारी है।

पहाड़ से उतरा पानी और मलबा बना तबाही का कारण

नेपाल-चीन सीमा के पास बुधवार सुबह तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआती तौर पर इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआत में इसकी तीव्रता 4.4 बताई थी।

बाद की जांच में सामने आया कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। इस बड़े भूस्खलन से पैदा हुआ मलबा और पानी तेजी से नीचे की ओर बहा। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी नदी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।

भूकंप जैसा महसूस हुआ 5.2 तीव्रता का झटका

भूस्खलन के कारण पैदा हुए तेज कंपन को आसपास के इलाकों में भूकंप जैसा महसूस किया गया। बाद में USGS ने स्पष्ट किया कि यह झटका किसी भूकंपीय गतिविधि के बजाय बड़े भूस्खलन के कारण उत्पन्न हुआ था।

30 फीट तक उठीं पानी की लहरें

बाढ़ का वेग इतना अधिक था कि कई स्थानों पर पानी और मलबे की ऊंची लहरें उठती दिखाई दीं। जान बचाने के लिए लोग घरों की ऊपरी मंजिलों और ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए। कई जगहों पर बचावकर्मियों ने अर्थमूवर और अन्य भारी मशीनों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।

फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पहुंचकर लापता लोगों की तलाश करना और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाना है।