हसदेव में कोयला खनन पर बढ़ा विरोध: विधायक देवेंद्र यादव ने केंद्र से लगाई रोक की गुहार
8 मई की बैठक से पहले पर्यावरण मंत्रालय की समिति को भेजा पत्र, 7 लाख पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों पर खतरे का जताया अंदेशा
दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के संवेदनशील हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केंटे एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर सियासत और पर्यावरणीय बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सलाहकार समिति को पत्र लिखकर 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्सन प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है। इस प्रस्ताव पर 8 मई 2026 को नई दिल्ली में समिति की अहम बैठक प्रस्तावित है।
विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि हसदेव अरण्य केवल कोयला भंडार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर और पर्यावरणीय संतुलन का प्रमुख आधार है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रस्तावित खनन परियोजना से करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई हो सकती है, जिससे पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित होने की आशंका है।
घने जंगल और जैव विविधता पर संकट
देवेंद्र यादव ने बताया कि प्रस्तावित कोल ब्लॉक का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा घने वन क्षेत्र में आता है। यह इलाका जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, जहां हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास मौजूद है। इसके अलावा क्षेत्र में सैकड़ों वनस्पति प्रजातियों के साथ 100 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के कारण हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर प्रभावित होंगे, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। साथ ही चारनोई नदी, हसदेव नदी और बांगो बांध के जलग्रहण क्षेत्र पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
आदिवासी जीवन और खेती पर असर की चिंता
विधायक ने अपने पत्र में वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें हसदेव क्षेत्र में आगे खनन नहीं किए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।
देवेंद्र यादव ने यह भी कहा कि प्रस्तावित परियोजना से आदिवासी समुदायों की आजीविका, जल स्रोत और कृषि व्यवस्था सीधे प्रभावित होगी। उन्होंने समिति से जनहित, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन को प्राथमिकता देते हुए खनन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देने की मांग की है।
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