13 साल से नहीं बढ़ी RTE राशि, अब 18 से 25 हजार तक करने की मांग
शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर राज्य में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को पत्र लिखकर RTE की वर्तमान दरों को अव्यावहारिक बताते हुए तत्काल संशोधन की मांग की है। संघ का कहना है कि बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच पिछले 13 वर्षों से राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
रायपुर। राज्य में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के अंतर्गत निजी विद्यालयों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को विस्तृत पत्र भेजकर वर्तमान भुगतान दरों में संशोधन की आवश्यकता बताई है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2012 के बाद से RTE प्रतिपूर्ति राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस अवधि में शिक्षकों के वेतन, प्रशासनिक खर्च, बिजली-पानी, भवन रखरखाव सहित अन्य व्ययों में कई गुना वृद्धि हुई है। ऐसे में वर्तमान दरें स्कूलों के लिए आर्थिक रूप से बोझिल साबित हो रही हैं।
???? कितनी बढ़ोतरी की मांग?
एसोसिएशन ने प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष 7,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए करने की मांग की है। माध्यमिक स्तर पर 11,500 रुपए से बढ़ाकर 22,000 रुपए तथा हाई और हायर सेकेंडरी स्तर पर अधिकतम 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही बढ़ी हुई दरों को पिछली तीन वर्षों से प्रभावी करने की मांग भी की गई है।
???? वेतन वृद्धि का दिया उदाहरण
संघ ने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2012 में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के वेतन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उदाहरण स्वरूप, विधायक का मासिक वेतन जो लगभग 45 हजार रुपए था, वह 2025-26 में बढ़कर करीब 1.60 लाख रुपए तक पहुंच गया है। इसी प्रकार आईएएस सहित अन्य अधिकारियों के वेतनमान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन RTE प्रतिपूर्ति राशि यथावत बनी हुई है।
???? हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर याचिका क्रमांक WPC 4988/2025 पर 19 सितंबर 2025 को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को छह माह के भीतर मांगों पर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे। संघ ने कहा है कि निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
संघ ने इसे गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते प्रतिपूर्ति दरों में संशोधन नहीं किया गया तो संगठन असहयोग आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
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