एनईपीपी में अटका प्रमोशन: बीएसपी कर्मियों की ग्रेडिंग पारदर्शिता पर उठे सवाल

एनईपीपी में अटका प्रमोशन: बीएसपी कर्मियों की ग्रेडिंग पारदर्शिता पर उठे सवाल

भिलाई इस्पात संयंत्र में नॉन एग्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी (एनईपीपी) के तहत क्लस्टर परिवर्तन में हो रही देरी को लेकर *कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। एस-5 से एस-6 ग्रेड में तीन वर्ष के भीतर अपग्रेडेशन न मिलने के मुद्दे को सीटू ने प्रबंधन के समक्ष उठाया। बैठक में ग्रेडिंग की पारदर्शिता और अस्पताल कर्मियों के पदनाम का विषय भी प्रमुखता से सामने आया।*

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में नॉन एग्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी (एनईपीपी) के क्रियान्वयन को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष उभरने लगा है। क्लस्टर परिवर्तन के दौरान निर्धारित तीन वर्षों में अपग्रेडेशन अथवा प्रमोशन न मिलने पर यूनियन ने प्रबंधन से हस्तक्षेप की मांग की है।

पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन CITU ने महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन) जेएन ठाकुर को पत्र सौंपकर कहा कि एस-5 से एस-6 ग्रेड में क्लस्टर चेंज के समय नियमानुसार तीन वर्ष में पदोन्नति दी जानी चाहिए। साथ ही विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया का पालन कर वरिष्ठता सुरक्षित रखने की मांग की गई है। प्रबंधन ने मामले का अध्ययन कर जल्द जानकारी देने का आश्वासन दिया है।

पॉलिसी के दुष्परिणाम सामने आ रहे’

सीटू महासचिव जोगा राव ने कहा कि 30 जून 2021 से लागू एनईपीपी के प्रभाव अब स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। लंबे समय से एक ही मशीन या विभाग में कार्यरत अनुभवी कर्मचारियों की संख्या घट रही है, जबकि विभागीय स्थानांतरण बढ़े हैं। उनका कहना है कि क्लस्टर चेंज के दौरान तीन वर्ष में प्रमोशन न मिलना पॉलिसी की व्यावहारिक कठिनाइयों को दर्शाता है।

विभागों में असमानता का आरोप

सहायक महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कुछ विभागों में तीन साल में अपग्रेडेशन दिया जा रहा है, जबकि अन्य विभागों में वरिष्ठता का हवाला देकर कर्मचारियों को बुलाया तक नहीं जाता। प्रबंधन कभी क्यूबीसीजी तो कभी एनईपीपी का संदर्भ देता है, जिससे कर्मियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

कर्मियों को दिखेगी अपनी ग्रेडिंग

बैठक में सीटू नेता डीवीएस रेड्डी ने यह मुद्दा भी उठाया कि अधिकारी अपने मूल्यांकन (ग्रेडिंग) को देख और उस पर अपील कर सकते हैं, लेकिन कर्मचारियों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पर महाप्रबंधक प्रभारी (एचआर) ने कहा कि तकनीकी तैयारी चल रही है और जल्द ही कर्मचारी अपनी आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से अपनी ग्रेडिंग देख सकेंगे।

मनोबल और उत्पादन पर असर

यूनियन अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े ने कहा कि संयंत्र की उत्पादन क्षमता बढ़ने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी आई है। ऐसे में क्लस्टर परिवर्तन के समय प्रमोशन में देरी से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। उन्होंने प्रबंधन से मनोबल बढ़ाने वाली नीतियों पर जोर देने की मांग की।

अस्पताल कर्मियों के पदनाम का मुद्दा भी उठा

बैठक में अस्पताल कर्मियों के पदनाम से संबंधित लंबित पत्रों का विषय भी उठाया गया। यूनियन ने कहा कि इस मामले में ठोस पहल न होने से कर्मचारियों में असंतोष है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि पत्रों का समग्र अध्ययन कर उचित कार्रवाई की जाएगी।