छत्तीसगढ़ में 65 लाख मतदाताओं के नाम अटके, 10 दिन में आपत्ति नहीं तो कटेगा नाम, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश

छत्तीसगढ़ में 65 लाख मतदाताओं के नाम अटके, 10 दिन में आपत्ति नहीं तो कटेगा नाम, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश

लॉजिकल एरर की समस्या छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी चल रही है। दरअसल विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं के दस्तावेज की एंट्री जब सिस्टम के ऐप में की गई तो, लाखों मतदाताओं के नाम सूची में जुड़ने से अटक गए। इनमें पिता-पुत्र के उम्र में अंतर 

लॉजिकल एरर की समस्या छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी चल रही है। दरअसल विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं के दस्तावेज की एंट्री जब सिस्टम के ऐप में की गई तो, लाखों मतदाताओं के नाम सूची में जुड़ने से अटक गए। इनमें पिता-पुत्र के उम्र में अंतर (15 व 50 साल), दादा पोते के उम्र में अंतर(40), पिता का नाम सेम होना और 6 बच्चे वाले के पिता के नाम वाले मतदाताओं को संदिग्ध मानते हुए सिस्टम ने ही रोक दिया है। अब इन मतदाताओं को फोन के माध्यम से संपर्क कर, या फिर घर जाकर दस्तावेज सत्यापन कर जोड़ा जा रहा है।

लेकिन कम समय में लाखों मतदाताओं को नोटिस देना और घर जाकर दस्तावेज सत्यापन करना बड़ी चुनौती है। इसको लेकर अब सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने भी निर्देश दिया है कि जिन मतदाताओं के नाम लॉजिकल एरर में हैं, इनकी सूची निकालकर चस्पा की जाए।

अब तक सभी मतदाताओं को नहीं थी जानकरी

जिन मतदाताओं मतदाताओं के नाम लॉजिकल एरर में थे, इन सभी मतदाताओं को इसकी जानकारी नहीं थीं। क्योकि इसकी जानकारी सिर्फ ऐप में थी, जो इसका संचालन कर रहे है वे ही देख पाते थे। वहां से लॉजिकल एरर वाले मतदाताओं का नाम निकालकर उनसे संपर्क कर दस्तावेज सत्यापन कर नाम जोड़ा जा रहा था। लेकिन इस सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब इसकी लॉजिकल एरर वाले मतदाताओं की सूची बनाई जाएगी। फिर इसे तहसील, जोन, ग्राम पंचायत समेत अन्य पब्लिक जगहों पर चस्पा किया जाएगा। जिसमें मतदाता खुद जाकर अपना नमा इस सूची में है कि नहीं देख पाएंगे, साथ ही संबंधित अधिकारी को भी इसकी जानकारी होगी।

 65 लाख मतदाताओं के नाम शामिल

निर्वाचन से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम लॉजिकल एरर में शामिल है। इनके नाम मतदाता सूची में ना ही अबतक जुडे है और ना ही काटे गए हैं। 14 फरवरी तक इन सभी के नाम नहीं जुड़ पाते तो सूची से कट हो जाएंगे। इसमें रायपुर जिले की संख्या 4 लाख 22 हजार है। वहीं इसके बाद मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए मतदाताओं को फार्म 6 भरना होगा, साथ ही 2003 से जुड़े 13 दस्तावेज में एक दस्तावेज प्रस्तुत कर नाम जोड़ना होगा।

शीर्ष के दिए निर्देशों का सख्ती से करना होगा पालन

तार्किक विसंगतियों (लॉजिकल एरर) की श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों के नाम ग्राम पंचायत भवनों, सार्वजनिक स्थानों और (तहसील) तालुका/उपमंडल, शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों सहित में प्रदर्शित किए जाएंगे।

लॉजिकल एरर की श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों की सूची प्रदर्शित होने की तिथि से 10 दिनों की अवधि के भीतर स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि (जिसमें बीएलए भी शामिल हो सकते हैं) के माध्यम से अपने दस्तावे•ा/आपत्तियां प्रस्तुत करने की अनुमति है।

दस्तावेज आपत्तियां बीएलए के कार्यालयों या (तहसील) तालुका/उप-मंडल स्तर के कार्यालयों में प्रस्तुत की जा सकती हैं।

(तहसील) तालुका/उप-मंडल स्तर के कार्यालय में स्वयं या अपने साथ आए अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सुनवाई का अवसर भी दिया जा सकता है।

दस्तावेज प्राप्त करने वाला या प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई प्रदान करने वाला अधिकारी ऐसे दस्तावेज की प्राप्ति और सुनवाई के संचालन को प्रमाणित कर सकता है।

यदि कोई प्राधिकार पत्र हो तो उसे और दस्तावेजों की प्राप्ति व ऐसी सुनवाइयों के संचालन का प्रमाण पत्र बीएलओ द्वारा बीएलओ ऐप में अपलोड किया जाएगा।

इन राज्यों में भी चल रहा एसआईआर, नोटिस होगी चस्पा

छत्तीसगढ़, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, गुजरात, गोवा, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु।