छत्तीसगढ़ में बढ़ते POCSO अपराधों पर वोरा का हमला, बोले— मासूमों की सुरक्षा खतरे में
दुर्ग-बिजापुर की घटनाओं से मचा हड़कंप • अपराधियों में कानून का भय खत्म—वोरा • फास्ट ट्रैक कोर्ट और काउंसलिंग सिस्टम मजबूत करने की मांग
दुर्ग। प्रदेश में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्ग और बीजापुर में हाल ही में सामने आए दिल दहला देने वाले मामलों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।
दुर्ग जिले में एक नाबालिग बच्ची के अपहरण के बाद दुष्कर्म कर उसे बोरे में फेंकने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। वहीं, इस सनसनी के थमने से पहले ही बीजापुर से एक और भयावह मामला सामने आया, जहां एक नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात ने कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए।
इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लगभग हर दिन बच्चों के खिलाफ अपराध की खबर सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़ित के परिचित या आसपास के लोग ही होते हैं, जिससे सामाजिक विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है।
वोरा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में POCSO के तहत दर्ज मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन कड़े कानूनों के बावजूद अपराधियों में किसी प्रकार का भय नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि कानून का असर कमजोर पड़ा है और अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल दोषियों को त्वरित और कठोर सजा दी जाए, ताकि समाज में सख्त संदेश जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
इसके साथ ही वोरा ने बच्चों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को भी गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने स्कूलों में काउंसलिंग व्यवस्था अनिवार्य करने, अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने और प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।
वोरा ने कहा कि अब केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को ठोस और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और समाज में कानून का विश्वास बहाल हो।
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