बस्तर की सियासत में नया मोड़! दंतेवाड़ा कांग्रेस के एक फैसले ने खींचा सबका ध्यान, आदिवासी नेता ने किया विरोध
दंतेवाड़ा कांग्रेस ने संगठन में बदलाव करते हुए शकील मोहम्मद रिजवी को नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। नियुक्ति के बाद बस्तर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और स्थानीय स्तर पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में कांग्रेस ने संगठन में बदलाव करते हुए दंतेवाड़ा जिले के नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है। लंबे समय से खाली पड़े पद पर वरिष्ठ नेता शकील मोहम्मद रिजवी को जिम्मेदारी दी गई है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह नियुक्ति की है। रिजवी की नियुक्ति के बाद बस्तर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस फैसले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। संगठन अब नए नेतृत्व के साथ आगे की रणनीति तैयार करेगा।
आदिवासी बहुल जिले में नियुक्ति बनी चर्चा का विषय
दंतेवाड़ा आदिवासी बहुल जिला है और यहां कांग्रेस संगठन में लंबे समय से स्थानीय नेताओं की सक्रिय भूमिका रही है। चुनाव से लेकर पार्टी के कार्यक्रमों तक स्थानीय कार्यकर्ता और नेता लगातार मैदान में नजर आते हैं। ऐसे में जिलाध्यक्ष पद पर बाहरी समीकरण के बजाय स्थानीय आदिवासी नेतृत्व को मौका मिलने की उम्मीद कई नेताओं में थी। अब शकील रिजवी की नियुक्ति के बाद संगठन के भीतर इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय नेताओं में नाराजगी की चर्चा
कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि आदिवासी क्षेत्र होने के कारण पार्टी को स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। उनका मानना है कि लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, पार्टी की ओर से इस नियुक्ति को लेकर अभी कोई अलग प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बस्तर की राजनीति पर पड़ सकता है असर
दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में संगठनात्मक नियुक्तियां हमेशा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। कांग्रेस का यह फैसला आने वाले समय में संगठन की रणनीति और स्थानीय समीकरणों पर असर डाल सकता है। अब नजर इस बात पर होगी कि नए जिलाध्यक्ष शकील रिजवी संगठन को किस तरह मजबूत करते हैं और स्थानीय नेताओं के साथ तालमेल कैसे बनाते हैं।
नए जिलाध्यक्ष के सामने बड़ी चुनौती
शकील रिजवी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत समन्वय बनाने की होगी। दंतेवाड़ा में कांग्रेस के सामने आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए संगठन को सक्रिय करना भी अहम माना जा रहा है।
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