महंगी कैंसर दवाओं पर सरकार का शिकंजा, 137 दवाओं के ट्रेड मार्जिन की सीमा तय
9 नवंबर से नई व्यवस्था लागू होने की जानकारी, अधिक कीमत पर बिक रही दवाओं के दाम घटाने होंगे; उत्पादन रोकने से पहले छह महीने का नोटिस अनिवार्य
नई दिल्ली (ए)। कैंसर के इलाज का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बना हुआ है। ऐसे में कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर सीमा तय करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के आदेश के अनुसार, नई व्यवस्था 9 नवंबर से प्रभावी होगी। इसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक कीमत पर बिकने वाली दवाओं के दाम कम करने होंगे।
इस सूची में कई महत्वपूर्ण कैंसररोधी दवाएं शामिल हैं। इनमें एटेजोलिज़ुमैब, बेवासिज़ुमैब, डाराटुमुमैब, एन्ज़ालुटामाइड, एर्लोटिनिब, इपिलिमुमैब और लैपाटेनिब के नाम हैं। हालांकि, कीट्रूडा को इस व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया है।
मार्जिन की सीमा से तय होगी अधिकतम कीमत
एनपीपीए के निर्देशों के मुताबिक, जीएसटी को छोड़कर अधिकतम खुदरा मूल्य पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। वितरक या स्टॉकिस्ट को मिलने वाली मूल कीमत के संदर्भ में यह 42.86 प्रतिशत मार्क-अप के बराबर है। नियम दवा की क्षमता, खुराक, स्वरूप और इस्तेमाल के तरीके के अनुसार लागू होंगे।
नई कीमतों की गणना के लिए मार्च 2026 में वितरकों को दी गई कीमत को आधार बनाया जाएगा। यदि संबंधित दवा की उस महीने बिक्री नहीं हुई थी, तो अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच के बिक्री आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक कीमत पर बिकने वाली दवाओं के दाम घटाने होंगे, जबकि पहले से कम कीमत पर उपलब्ध दवाओं के मौजूदा दाम बरकरार रहेंगे।
उत्पादन और आपूर्ति पर भी निगरानी
सरकार ने दवाओं की उपलब्धता प्रभावित नहीं होने देने के लिए कंपनियों को मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने का निर्देश दिया है। उत्पादन कम करने से पहले प्राधिकरण की लिखित अनुमति लेनी होगी। किसी दवा का उत्पादन या आयात पूरी तरह बंद करने की स्थिति में छह महीने पहले सूचना देना अनिवार्य होगा।
नए नियम उन दवा फॉर्मूलेशन पर भी लागू होंगे, जिन्हें 31 मार्च 2026 के बाद बाजार में उतारा गया है और जिनमें सूचीबद्ध दवाओं का कोई घटक मौजूद है। अस्पतालों और कैंसर संस्थानों को सीधे दवा बेचने वाली कंपनियों के लिए भी मूल्य निर्धारण संबंधी प्रावधान लागू होंगे।
मूल्य सूची सार्वजनिक नहीं करने पर कार्रवाई
दवा कंपनियों को राजपत्र में आदेश प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर संशोधित मूल्य सूची एनपीपीए और संबंधित राज्य औषधि नियंत्रकों को सौंपनी होगी। साथ ही इसे एकीकृत औषधि डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली पर सार्वजनिक करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज और लागू दंड के साथ वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
कंपनियों की ओर से मरीज सहायता कार्यक्रम के तहत मुफ्त दी जाने वाली दवाओं को कुछ शर्तों के साथ छूट दी गई है। हालांकि, ऐसी दवाओं के वितरण, मरीजों और स्टॉक से जुड़ा रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा। नई व्यवस्था के प्रभावी होने के बाद संबंधित एजेंसियां और अस्पताल दवाओं की कीमतों पर निगरानी रखेंगे।
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