साइबर ठगी के नेटवर्क पर भिलाई पुलिस का शिकंजा, 120 संदिग्ध बैंक खाताधारकों के खिलाफ केस दर्ज
पीएनबी के खातों का ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप, करोड़ों की साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन की जांच शुरू
साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भिलाई नगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के 120 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त राशि को जमा करने और विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने सभी मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
भिलाई। देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में भिलाई नगर पुलिस ने अहम कार्रवाई करते हुए पंजाब नेशनल बैंक के 120 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल तथा पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर थाना भिलाई नगर क्षेत्र में संचालित पीएनबी खातों की जांच की गई। जांच के दौरान कई खाते साइबर ठगी से प्राप्त राशि के प्रथम स्तर के 'म्यूल अकाउंट' के रूप में उपयोग किए जाते पाए गए।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि इन खातों में जमा कर विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित की गई अथवा नकद निकाली गई। पुलिस का मानना है कि इन खातों का उपयोग अवैध आर्थिक लाभ अर्जित करने और ठगी की रकम के स्रोत को छिपाने के उद्देश्य से किया गया।
मामले में भिलाई नगर थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 388/2026 दर्ज करते हुए 120 खाताधारकों को आरोपी बनाया है। सभी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। पुलिस प्रत्येक खाताधारक की भूमिका और लेनदेन की विस्तार से जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठग अक्सर लालच या कमीशन का प्रलोभन देकर लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के रूप में करते हैं, जिससे ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर उसकी ट्रैकिंग कठिन हो जाती है। ऐसे मामलों में खाताधारक की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक या इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। अनजाने में भी इस प्रकार की गतिविधि साइबर अपराध का हिस्सा बन सकती है और संबंधित खाताधारक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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