हादसों पर लगेगी लगाम: कोहका का रानी अवंतीबाई चौक बदलेगा स्वरूप, नई डिजाइन पर शुरू हुई तैयारी
लगातार हो रहे सड़क हादसों के बाद ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी की पहल, 10 मीटर गोलाकार रोटरी बनेगी; मूर्ति को अस्थायी रूप से किया जाएगा स्थानांतरित
भिलाई के व्यस्ततम यातायात केंद्रों में शामिल रानी अवंतीबाई चौक कोहका की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। लगातार हो रहे सड़क हादसों और यातायात अव्यवस्था को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस एवं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने चौक की डिजाइन में व्यापक बदलाव का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यहां यातायात अधिक व्यवस्थित होगा और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
भिलाई। शहर के कोहका स्थित रानी अवंतीबाई चौक को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। वर्तमान में ओवल आकार की रोटरी और चौक की अधिक चौड़ाई के कारण वाहन चालक निर्धारित दिशा का पालन किए बिना गलत दिशा से निकल जाते हैं, जिससे यहां अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रही हैं।
इसी समस्या के समाधान के लिए एडिशनल एसपी ट्रैफिक रिचा मिश्रा, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और लोधी समाज के प्रतिनिधियों ने चौक का संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चौक की मौजूदा संरचना का अध्ययन कर यातायात सुधार के लिए आवश्यक बदलावों पर चर्चा की गई।
एएसपी रिचा मिश्रा ने बताया कि चौक को अब 10 मीटर व्यास की गोलाकार रोटरी के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए रानी अवंतीबाई की प्रतिमा को अस्थायी रूप से हटाकर चौक के मध्य भाग में पुनर्स्थापित करने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित डिजाइन पर अमल से पहले ट्रायल के तौर पर बैरिकेडिंग लगाकर अस्थायी रोटरी बनाई जाएगी, ताकि तकनीकी पहलुओं और यातायात प्रवाह का परीक्षण किया जा सके।
उन्होंने बताया कि परीक्षण सफल रहने के बाद स्थायी निर्माण कार्य किया जाएगा और प्रतिमा को सम्मानपूर्वक नए स्वरूप वाले चौक में स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में समाज के प्रतिनिधियों से भी सहमति प्राप्त की जा रही है।
गौरतलब है कि यह चौक शहर के चार महत्वपूर्ण मार्गों को जोड़ता है। यहां से आईआईटी भिलाई, कुरूद बस्ती, जुनवानी और गदा चौक सुपेला की ओर यातायात संचालित होता है। ऐसे में चौक की नई डिजाइन न केवल यातायात को सुगम बनाएगी बल्कि सड़क सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।
प्रशासन का मानना है कि चौक के पुनर्गठन के बाद वाहन चालकों को स्पष्ट दिशा मिलेगी, यातायात का दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं की संभावना में उल्लेखनीय कमी आएगी।
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