ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के लिए रूस आया आगे, गल्फ देशों से बातचीत के बाद सीज़फायर को बताया ज़रूरी

ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के लिए रूस आया आगे, गल्फ देशों से बातचीत के बाद सीज़फायर को बताया ज़रूरी

ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के लिए रूस आगे आया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सीज़फायर को ज़रूरी बताया है।

ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) की वजह से मिडिल ईस्ट (Middle East) में तबाही मचने का सिलसिला थम नहीं रहा है। सिर्फ ईरान ही नहीं, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों को भी युद्ध का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इज़रायल को भी इस युद्ध की वजह से नुकसान हुआ है। अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि ईरान से अप्रयत्क्ष रूप से बातचीत जारी है, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों की ओर से हमले नहीं रुक रहे है। इसी बीच अब युद्ध को रोकने के लिए रूस (Russia) आगे आया है।

सीज़फायर को बताया ज़रूरी

रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) ने गल्फ देशों के अपने समकक्षों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और सीज़फायर को ज़रूरी बताया। उन्होंने तत्काल रूप से इस युद्ध को रोकने की अपील की। लावरोव ने कहा कि रूस, गल्फ देशों के साथ घनिष्ठ तालमेल बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, जिससे जल्द से जल्द युद्धविराम सुनिश्चित किया जा सके और ईरान के साथ ही मिडिल ईस्ट में अन्य देशों के खिलाफ हमलों को रोका जा सके।

राजनीतिक समाधान की अपील

लावरोव ने गल्फ देशों के अपने समकक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनीतिक समाधान के ज़रिए युद्ध को रोकने की अपील की। रूसी विदेश मंत्री ने बातचीत के ज़रिए शांति स्थापना पर जोर दिया। लावरोव ने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट के सभी देशों के बीच सहयोग बनाए रखने और क्षेत्र में स्थायी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट और ठोस व्यवस्थाएं स्थापित की जानी चाहिए, जिससे शांति स्थापित हो।

ईरान पर हमला बेतुका

लावरोव ने अमेरिका और इज़रायल पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ इन दोनों देशों ने बिना किसी उकसावे के हमला किया। रूसी विदेश मंत्री ने ईरान पर हमले को बेतुका बताते हुए जल्द से जल्द युद्ध को रोकने की अपील की। लावरोव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इन देशों को युद्ध में घसीटना और उनके नागरिक बुनियादी ढांचे जिसमें ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल हैं, पर हमला करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।