गूगल पर नंबर सर्च करना पड़ा भारी, बुजुर्ग के खाते से 1.95 लाख उड़ाए

गैस एजेंसी के फर्जी कस्टमर केयर बनकर साइबर ठगों ने दिया वारदात को अंजाम, पुलिस डिजिटल ट्रेल खंगालने में जुटी

गूगल पर नंबर सर्च करना पड़ा भारी, बुजुर्ग के खाते से 1.95 लाख उड़ाए

दुर्ग जिले में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग को गैस एजेंसी का फर्जी कस्टमर केयर नंबर देकर ऑनलाइन ठगी का शिकार बना लिया। सिलेंडर डिलीवरी की समस्या सुलझाने के नाम पर ठगों ने पहले 10 रुपए ट्रांसफर करवाए और फिर दो बैंक खातों से कुल 1.95 लाख रुपए पार कर दिए। मामले में नेवई थाना पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दुर्ग-भिलाई। दुर्ग-भिलाई में साइबर अपराधियों का नया तरीका सामने आया है। इंटरनेट पर गैस एजेंसी का नंबर सर्च करना एक बुजुर्ग के लिए भारी पड़ गया। ठगों ने खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताकर न केवल भरोसा जीता, बल्कि बैंक खातों तक पहुंच बनाकर लाखों रुपए की ठगी कर ली।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, अवधपुरी रिसाली निवासी 65 वर्षीय किशोर कुमार साहू ने 23 मई 2026 को गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं मिलने पर सेक्टर-10 स्थित जयदीप गैस एजेंसी का कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर खोजा था। सर्च के दौरान मिले एक मोबाइल नंबर पर उन्होंने संपर्क किया, जिसे वे एजेंसी का आधिकारिक नंबर समझ बैठे।

फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताते हुए समस्या समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बाद उसने एक व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराया और गैस सेवा एक्टिवेशन के नाम पर 10 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा। भरोसे में आकर बुजुर्ग ने फोन-पे के जरिए रकम भेज दी।

पुलिस के मुताबिक, इसी छोटे ट्रांजेक्शन के जरिए साइबर ठगों ने बैंकिंग एक्सेस हासिल कर लिया। करीब आधे घंटे बाद पीड़ित के एसबीआई खाते से 97 हजार रुपए निकाल लिए गए। इसके तीन दिन बाद 26 मई को यूको बैंक खाते से भी 98 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 95 हजार रुपए की ठगी हो गई।

मोबाइल पर रकम कटने का मैसेज मिलने के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में नेवई थाना पहुंचकर लिखित आवेदन भी दिया गया। शिकायत के साथ बैंक खातों की जानकारी, साइबर शिकायत की कॉपी और ट्रांजेक्शन डिटेल पुलिस को सौंपी गई।

भिलाई नगर सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर मोबाइल नंबर धारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साइबर सेल की मदद से मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल के जरिए आरोपियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कंपनी या संस्था का कस्टमर केयर नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ही प्राप्त करें। अनजान नंबरों पर कॉल करने, संदिग्ध लिंक खोलने या छोटी राशि ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल जरूर करें, क्योंकि साइबर ठग अब फर्जी कस्टमर केयर नंबरों को नया हथियार बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।