दुर्ग में आपदा से निपटने महाअभ्यास, हवाई हमले जैसी स्थिति पर मॉक ड्रिल
सायरन बजा, घायलों का रेस्क्यू, आग बुझाने और ढही इमारतों से लोगों को निकालने का प्रदर्शन; जिले में 15 मिनट ब्लैकआउट भी किया गया
दुर्ग। जिले में हवाई हमले जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को नगर सेना कार्यालय में बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान विभिन्न विभागों की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया।
अभ्यास में सिविल डिफेंस वालेंटियर्स, एसडीआरएफ, नगर सैनिक और फायर ब्रिगेड के जवानों ने हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल की शुरुआत सायरन कोड के माध्यम से आम नागरिकों को खतरे की सूचना देने की प्रक्रिया से हुई। इसके जरिए आपदा के समय सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया का संदेश दिया गया।
इसके बाद तीन चरणों में रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया गया। पहले चरण में सिविल डिफेंस वालेंटियर्स ने घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद सुरक्षित रूप से नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया दिखाई। दूसरे चरण में फायर ब्रिगेड की टीम ने हवाई हमले के बाद लगी आग पर नियंत्रण पाने की कार्यवाही का प्रदर्शन किया।
तीसरे चरण में एसडीआरएफ की टीम ने ढही हुई बहुमंजिला इमारतों में फंसे लोगों की खोज और बचाव अभियान चलाया। टीम ने ऊपरी मंजिलों से घायलों को स्ट्रेचर की सहायता से सुरक्षित नीचे उतारकर अपनी दक्षता दिखाई।
मॉक ड्रिल के तहत शाम 7 बजे से 7:15 बजे तक जिले में ब्लैकआउट भी किया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति बंद रखी गई। चौक-चौराहों पर वाहनों को रोककर उनकी हेडलाइट बंद कराई गई, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में पालन की जाने वाली व्यवस्थाओं का अभ्यास किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान सांसद विजय बघेल, कलेक्टर अभिजीत सिंह, संयुक्त कलेक्टर हरवंश मिरी, प्रभारी अधिकारी सिल्ली थॉमस, नोडल अधिकारी नागेंद्र सिंह सहित कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इसे आपदा प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण अभ्यास बताया।
प्रशासन का कहना है कि इस तरह के अभ्यास से आपदा या युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में त्वरित निर्णय, समन्वय और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
suntimes 