रक्षाबंधन की मिठास में मिलावट का खतरा: खोया-पनीर से घी तक ऐसे पहचानें संदिग्ध खाद्य पदार्थ

मिठाई का रंग, गंध और बनावट बताएंगे शुरुआती संकेत; पैक्ड सामान में FSSAI नंबर-डेट देखें, शक हो तो बिल के साथ करें शिकायत

रक्षाबंधन की मिठास में मिलावट का खतरा: खोया-पनीर से घी तक ऐसे पहचानें संदिग्ध खाद्य पदार्थ

रायपुर। रक्षाबंधन के साथ मिठाई बाजार में रौनक बढ़ गई है, लेकिन इसी बढ़ती मांग के बीच मिलावटी खोया, पनीर, घी और रंगीन मिठाइयों को लेकर उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार से मिठाई खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत और दिखावट पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। फूड एंड ड्रग विभाग के फूड एनालिस्ट अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच घर पर भी की जा सकती है। आयोडीन टिंचर से खोया-पनीर और घी में स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है। वहीं मिठाई की रंगत, गंध, बनावट और दुकान की साफ-सफाई देखकर भी कई शुरुआती संकेत पहचाने जा सकते हैं।

चमकदार मिठाई देखकर न हों आकर्षित

त्योहार पर ग्राहक अक्सर चमकीले और आकर्षक रंग वाली मिठाइयों की ओर खिंचते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर मिठाई का रंग जरूरत से ज्यादा चटख दिखाई दे या उसमें असामान्य तेज खुशबू हो तो सावधानी बरतनी चाहिए।

मिठाई की सामान्य गंध और स्वाद से अलग कुछ महसूस हो तो उसे खरीदने या खाने से बचना बेहतर है। संदिग्ध खाद्य पदार्थ की पक्की जांच के लिए प्रयोगशाला परीक्षण ही भरोसेमंद तरीका है।

आयोडीन टेस्ट से खोया-पनीर की शुरुआती जांच

खोया या पनीर में स्टार्च की प्राथमिक जांच के लिए थोड़ी मात्रा पानी के साथ गर्म कर लें। मिश्रण ठंडा होने के बाद आयोडीन टिंचर की 2 से 3 बूंद डालें। नीला या नीला-काला रंग दिखाई देने पर स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है।

इस टेस्ट का उद्देश्य केवल शुरुआती स्तर पर संदेह की पहचान करना है। रंग बदलने का अर्थ अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरा खाद्य पदार्थ असुरक्षित या मिलावटी है। अंतिम पुष्टि के लिए सैंपल की अधिकृत लैब में जांच जरूरी है।

घी में भी मिलावट का संकेत

घी या मक्खन में स्टार्च की प्राथमिक जांच के लिए थोड़ी मात्रा पारदर्शी बर्तन में लेकर आयोडीन टिंचर की 2 से 3 बूंद डाल सकते हैं। नीला रंग आने पर स्टार्चयुक्त पदार्थ की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है।

घी की वास्तविक शुद्धता जानने के लिए केवल घरेलू टेस्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

पनीर खरीदते समय तीन चीजें जरूर देखें

पनीर खरीदते समय सिर्फ उसका सफेद रंग देखकर फैसला न करें। उसकी गंध, बनावट और ताजगी भी जांचें। बहुत ज्यादा सख्त पनीर, असामान्य गंध या बदला हुआ स्वाद गुणवत्ता पर सवाल खड़ा कर सकता है।

पैक्ड पनीर खरीदते समय निर्माण तिथि, बेस्ट-बिफोर या यूज-बाय डेट जरूर देखें।

छेने की मिठाई में ये बदलाव दिखें तो न खरीदें

रसगुल्ला, रबड़ी, कलाकंद और अन्य दूध से बनी मिठाइयों में जरूरत से ज्यादा पानी निकलना, परत अलग होना, बदबू आना या फफूंदी दिखाई देना खराब गुणवत्ता या खराब भंडारण का संकेत हो सकता है।

ऐसी मिठाई को चखकर जांचने के बजाय सीधे खरीदने से बचना चाहिए।

दुकान की सफाई भी करें चेक

मिठाई की दुकान पर जाते समय यह जरूर देखें कि खाद्य सामग्री ढककर रखी गई है या नहीं। मिठाइयों पर मक्खियां बैठ रही हों, धूल जमा हो या आसपास गंदगी हो तो ऐसी दुकान से खरीदारी न करना बेहतर है।

साफ-सफाई और उचित भंडारण खाद्य सुरक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

पैक्ड सामान में ये जानकारी जरूर पढ़ें

दूध, पनीर, घी या अन्य पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल की जांच करें। FSSAI लोगो और लाइसेंस नंबर, बैच/लॉट नंबर, निर्माता की जानकारी, सामग्री, शुद्ध मात्रा और तारीख देखें।

पैकेट फूला, फटा या लीक हो तो उसे खरीदने से बचें। खरीदारी का बिल लेना भी जरूरी है, क्योंकि शिकायत के समय यह महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकता है।

मिलावट का शक हो तो ऐसे करें शिकायत

खाद्य पदार्थ में मिलावट या खराब गुणवत्ता का संदेह होने पर दुकान का नाम और पता, खाद्य पदार्थ का नाम, खरीद की तारीख और शिकायत का कारण नोट करें। पैकेट की फोटो, लेबल और बिल को सुरक्षित रखें।

FSSAI के Food Safety Connect माध्यम से शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के खाद्य सुरक्षा विभाग तक भी शिकायत पहुंचाई जा सकती है। शिकायत में खाद्य पदार्थ की समस्या स्पष्ट रूप से दर्ज करना चाहिए।

घरेलू टेस्ट सिर्फ शुरुआती जांच

एक्सपर्ट के मुताबिक घर पर किए जाने वाले टेस्ट उपभोक्ता को मिलावट का शुरुआती संकेत दे सकते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी खाद्य पदार्थ की शुद्धता या उसमें किसी खास रसायन की मौजूदगी की पुष्टि अधिकृत खाद्य प्रयोगशाला की जांच से ही की जानी चाहिए।

विशेष रूप से एसिड या अन्य रसायनों से घर पर खाद्य पदार्थ की जांच करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसे परीक्षण प्रशिक्षित विशेषज्ञों और अधिकृत प्रयोगशाला में ही किए जाने चाहिए।

मिलावट पर कानूनी कार्रवाई

सीनियर एडवोकेट विराट वर्मा के अनुसार खाद्य पदार्थों में मिलावट, असुरक्षित खाद्य सामग्री की बिक्री और संबंधित अपराधों पर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। मामले की गंभीरता और तथ्यों के आधार पर जुर्माना और कारावास दोनों हो सकते हैं।