FSNL श्रमिकों पर रोज़गार संकट गहराया: टेंडर नीति के विरोध में 30 मार्च को बड़ा आंदोलन

Bhilai Steel Plant की टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

FSNL श्रमिकों पर रोज़गार संकट गहराया: टेंडर नीति के विरोध में 30 मार्च को बड़ा आंदोलन

भिलाई। भिलाई में Ferro Scrap Nigam Limited से जुड़े सैकड़ों श्रमिक इन दिनों रोजगार संकट का सामना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रमुख नियोक्ता Bhilai Steel Plant द्वारा FSNL को पर्याप्त कार्य देने के बजाय ग्लोबल टेंडर जारी किया गया, जिससे यहां कार्यरत 800 से अधिक श्रमिक प्रभावित हो रहे हैं।

नई टेंडर प्रक्रिया में लगभग 750 करोड़ रुपए के काम को चार हिस्सों में बांटा गया है। इसके चलते FSNL को मिलने वाला कार्य काफी कम हो गया, जो मौजूदा श्रमिकों के लिए पर्याप्त नहीं है। इस निर्णय के विरोध में “FSNL बचाओ संघर्ष समिति” का गठन किया गया है, जिसके बैनर तले 30 मार्च को सेक्टर-1 स्थित मुर्गा चौक पर बड़े आंदोलन और हड़ताल का ऐलान किया गया है।

शनिवार को आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में संयोजक मंडल के सदस्य गजेन्द्र सिंह, राजु लाल श्रेष्ठ और अरुण सिंह सिसोदिया ने बताया कि FSNL पहले भारत सरकार का उपक्रम था, जिसे विनिवेश नीति के तहत निजी कंपनी Konoike Transport को लगभग 320 करोड़ रुपए में सौंप दिया गया, जबकि इसकी वास्तविक बाजार कीमत इससे कहीं अधिक बताई जाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में स्क्रैप माफिया और कुछ नीतिगत बदलावों के कारण FSNL को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पहले जहां टेंडर एक ही पार्टी को दिए जाते थे, वहीं अब ओपन टेंडर प्रणाली लागू होने से काम बंट गया है।

संयोजकों ने बताया कि FSNL पिछले चार दशकों से इस्पात उद्योग में स्लैग और स्क्रैप प्रोसेसिंग का कार्य कर रही है, जिससे सरकार को हजारों करोड़ का लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि कारखाना अधिनियम 1948 के तहत प्रमुख नियोक्ता और ठेका नियोक्ता दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि श्रमिकों की नौकरी और सेवा शर्तें सुरक्षित रहें।

श्रमिकों की प्रमुख मांगों में सेवा निरंतरता, वेतनमान में कोई कटौती न होना, ठेका बदलने पर छंटनी न करना, नए वेज कोड के तहत नियुक्ति पत्र देना और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना शामिल है। साथ ही श्रमिकों को वेतन पर्ची, अवकाश और अन्य श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाएं देने की भी मांग की गई है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।