अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी का आरोप: नियमों की अनदेखी पर निगम प्रशासन घिरा
मानवाधिकार आयोग ने उठाए सवाल, RTI में जानकारी छिपाने और बिना सत्यापन नियुक्ति देने का आरोप
रायपुर नगर निगम में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने आरोप लगाया है कि नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां दी गईं और सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी भी अधूरी दी जा रही है।
रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर में अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने इस संबंध में निगम आयुक्त को शिकायत भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आदेश क्रमांक 1046/2025 के तहत बिना निर्धारित आयु सीमा के समुचित सत्यापन के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए। इसे सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों और सेवा नियमों का उल्लंघन बताया गया है। शर्मा ने अधिकारियों द्वारा दिए गए "प्रपत्रों में बदलाव" और "कार्यभार अधिक होने" जैसे तर्कों को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए सवाल उठाया कि क्या संवेदनशील मामलों में बिना जांच के ही आदेश जारी किए जा रहे हैं।
मामले में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर भी विवाद सामने आया है। शिकायत के अनुसार, डीम्ड जन सूचना अधिकारी द्वारा वास्तविक दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय केवल कारण बताओ नोटिस की प्रतियां दी गईं, जो अधूरी और भ्रामक जानकारी मानी जा रही है।
इस पूरे प्रकरण पर आयोग के प्रदेश अध्यक्ष गुरदीप सिंह ने कहा कि अपात्र व्यक्तियों को लाभ पहुंचाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, जिससे पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का प्रयास बताया।
आयोग ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि, वेतन वृद्धि रोकने जैसे दंड लागू किए जाएं और उनकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जन सूचना अधिकारी को निर्देशित किया जाए कि सात दिनों के भीतर सभी वांछित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
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