त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का झटका, रोजमर्रा की कई चीजें होंगी महंगी
कच्चे माल और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी का असर, त्योहारों से पहले FMCG, पेंट, डेयरी और होम प्रोडक्ट्स महंगे करने की तैयारी; कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालेंगी।
आगामी त्योहारों के मौसम से पहले आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। देश की प्रमुख एफएमसीजी और उपभोक्ता उत्पाद कंपनियों ने टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, डिशवॉश बार, नमक, पेंट और अन्य जरूरी घरेलू उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। कच्चे माल, कच्चे तेल और ऊर्जा लागत में लगातार हो रही वृद्धि के चलते कंपनियां दूसरी तिमाही में भी दाम बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
मुंबई/नई दिल्ली (ए)। अगस्त से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन से पहले बाजार में महंगाई का असर और गहरा होने जा रहा है। रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई जरूरी वस्तुएं आने वाले दिनों में महंगी हो सकती हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL), एशियन पेंट्स, डोडला डेयरी, हैवेल्स इंडिया और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स सहित कई बड़ी कंपनियों ने बढ़ती लागत के कारण उत्पादों की कीमतों में इजाफा करने की तैयारी शुरू कर दी है।
कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही पैकेजिंग सामग्री, रसायन और ऊर्जा पर होने वाला खर्च भी पहले की तुलना में अधिक हो गया है। ऐसे में लागत का दबाव कम करने के लिए कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया है।
हिंदुस्तान यूनिलीवर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) निरंजन गुप्ता के अनुसार, कच्चे तेल से जुड़े डेरिवेटिव्स महंगे होने का सीधा असर होम केयर उत्पादों पर पड़ रहा है। इसी वजह से कंपनी डिटर्जेंट और डिशवॉशिंग बार जैसी श्रेणियों में चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ा रही है।
वहीं, हैवेल्स इंडिया अपने कई उत्पादों के दाम करीब 8 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है, जबकि टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने टाटा साल्ट की कीमतों में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। अन्य कंपनियां भी आने वाले सप्ताहों में इसी तरह की घोषणा कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त से नवंबर तक चलने वाला त्योहारी सीजन कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बिक्री का दौर होता है। कई कंपनियों की सालाना बिक्री का करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी अवधि में आता है। मजबूत मांग को देखते हुए कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित करने में अधिक सहज महसूस कर रही हैं।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार यदि कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले महीनों में रोजमर्रा की जरूरत के कई अन्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं, जिससे आम परिवारों का मासिक घरेलू बजट और प्रभावित होगा।
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